केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज राजधानी दिल्ली में आयोजित ‘नेशनल एग्रो-आरई समिट 2025’ को संबोधित किया. यह सम्मेलन नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (NSEFI) द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें कृषि क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकृत उपयोग को लेकर विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और किसानों के बीच गहन चर्चा हुई.
श्री चौहान ने इस अवसर पर कहा कि आज का किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं, बल्कि ऊर्जादाता भी बन सकता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि खेती और सौर ऊर्जा के संगम से नई कृषि-ऊर्जा प्रणाली विकसित की जा सकती है, जिससे न केवल किसान की आय बढ़ेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी बड़ा योगदान होगा. उन्होंने फेडरेशन द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट और वार्षिक पुस्तिका का विमोचन भी किया.
शिवराज सिंह चौहान का विजन
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014-15 के बाद से देश का कृषि उत्पादन 40 प्रतिशत तक बढ़ चुका है. उन्होंने गेहूं, धान, मक्का और मूंगफली के क्षेत्र में हुई बढ़ोत्तरी का हवाला देते हुए कहा कि अब ध्यान दलहन और तिलहन के उत्पादन पर केंद्रित करना होगा.
शिवराज सिंह ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था और रोज़गार आज भी बड़ी हद तक कृषि पर निर्भर है. ऐसे में किसानों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग (एकीकृत कृषि प्रणाली) को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है. इससे सीमांत और छोटे किसान अपनी सीमित जमीन का बेहतर उपयोग कर आय और आत्मनिर्भरता दोनों हासिल कर सकते हैं.
ऊर्जा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री कुसुम योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि खेतों में ऊंचाई पर सोलर पैनल लगाकर और नीचे खेती करके दोहरी फसल और ऊर्जा का मॉडल अपनाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि यह मॉडल खासकर छोटे और मध्यम किसानों के लिए बेहद लाभकारी हो सकता है, जो उन्हें अन्नदाता के साथ-साथ ऊर्जादाता भी बनाएगा.
पर्यावरण संरक्षण का आह्वान
सम्मेलन में बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने 5 जून के विश्व पर्यावरण दिवस को सार्थक बनाने का आह्वान किया और कहा कि सौर ऊर्जा न केवल कृषि का भविष्य है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण के लिए भी मील का पत्थर साबित हो सकती है.
श्री चौहान इन दिनों देश भर में जारी ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के तहत कई राज्यों का दौरा कर रहे हैं और किसानों से सीधा संवाद कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि किसान की समृद्धि के लिए उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना हमारी प्रमुख प्राथमिकताएं हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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