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सपा प्रवक्ता के विवादित बयान पर ब्राह्मण समाज में आक्रोश, टिप्पणी के बाद मांगी माफी

SP Spokesperson Brahmin Controversy: सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी के ब्राह्मण समाज पर विवादित बयान से बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है. बाद में भाटी ने माफी मांगते हुए सफाई दी.

SP Spokesperson Brahmin Controversy: समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने 5 मई को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में ऐसा मुहावरा सुनाया जिसने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया. उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज पर बने पुराने कहावतों का जिक्र कर रहे थे, जिसमें ब्राह्मणों को वेश्याओं से भी बदतर बताया गया. इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हंगामा मच गया और ब्राह्मण समाज में गहरी नाराजगी फैल गई.

सोशल मीडिया पर गुस्सा

वीडियो सामने आते ही ट्विटर और फेसबुक पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी. कई यूजर्स ने इसे ब्राह्मण समाज का अपमान बताया और सपा नेतृत्व से जवाब मांगा. देखते ही देखते यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया.

डिप्टी सीएम का हमला

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने इस बयान पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को घेरा. उन्होंने कहा कि पूरे देश का ब्राह्मण समाज इस तरह की भाषा को बर्दाश्त नहीं करेगा. पाठक ने आरोप लगाया कि यह सपा का असली चेहरा है, जो बार-बार सनातन और संत समाज के खिलाफ बयानबाजी करती रही है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कभी आज़म खान भारत माता को डायन कहते हैं, कभी स्वामी प्रसाद मौर्या रामचरित मानस को जलाते हैं और कभी सांसद प्रधानमंत्री पर अपशब्द कहते हैं.

सपा की मानसिकता पर सवाल

बृजेश पाठक ने कहा कि जिस ब्राह्मण समाज ने देश को संस्कृति, संविधान और राष्ट्र निर्माण की दिशा दी, उसके खिलाफ ऐसी भाषा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने मांग की कि अखिलेश यादव स्पष्ट करें कि क्या यह बयान उनकी पार्टी की आधिकारिक सोच है. अगर नहीं, तो तुरंत कार्रवाई करें और सार्वजनिक माफी मांगें.

राजकुमार भाटी का बचाव

मामला बढ़ता देख राजकुमार भाटी ने बिना शर्त माफी मांग ली. उन्होंने कहा कि अगर किसी ब्राह्मण भाई को मेरी बात से ठेस पहुंची है तो मैं क्षमा चाहता हूं. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाषण के कुछ हिस्से को काटकर गलत तरीके से प्रचारित किया गया.

बयान का संदर्भ

भाटी ने सफाई देते हुए कहा कि वे समाज में प्रचलित गंदे मुहावरों और कहावतों का विरोध कर रहे थे. उन्होंने पहले गुर्जर और यादवों पर बने मुहावरों का उदाहरण दिया और फिर ब्राह्मणों से जुड़ी कहावत का जिक्र किया. उनका कहना था कि वे इन कहावतों का समर्थन नहीं कर रहे थे बल्कि यह दिखाना चाहते थे कि समाज में हर जाति के खिलाफ अपमानजनक कहावतें बनाई गई हैं.

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राजकुमार भाटी का बयान और उसके बाद माफी ने सियासी हलचल तेज कर दी है. बीजेपी ने इसे सपा की मानसिकता करार दिया है, जबकि भाटी का कहना है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया. अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि सपा नेतृत्व इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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