राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अध्यक्ष पर नियुक्त डॉक्टर अनिल खुराना की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने यह फैसला दिया है. कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अध्यक्ष पर पर नियुक्त डॉक्टर अनिल खुराना की नियुक्ति को बरकरार रखा था.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि बिना कोई नीतिगत निर्णय लिए एक सप्ताह के भीतर पद छोड़ना होगा. कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा कि वह डॉक्टर अनिल खुराना की नियुक्ति कानून के अनुरूप नही थी. कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी साफ कर दिया कि भविष्य में खुराना को कोई लाभ नही मिलेगा. सुप्रीम कोर्ट ने नए अध्यक्ष की नियुक्ति की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने का निर्देश दिया है. डॉक्टर खुराना द्वारा अब तक कि गई सेवा के आधार पर उनके लाभों को प्रभावित नहीं किया जाएगा.
खुराना की नियुक्ति पर हाई कोर्ट को चुनौती
याचिकाकर्ता डॉक्टर अमरागौड़ा एल पाटिल ने कर्नाटक हाई कोर्ट में खुराना की नियुक्ति को चुनौती दी थी. कर्नाटक हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने डॉक्टर पाटिल की दलील को सही मानते हुए डॉक्टर खुराना की नियुक्ति को रद्द करते हुए केंद्रीय आयुष मंत्रालय को अध्यक्ष पद के लिए नए सिरे से नियुक्ति का आदेश दिया था. जिसके खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील दायर की गई थी. जिसे डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को पलट दिया था. याचिकाकर्ता की दलील है कि खुराना की नियुक्ति में राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग अधिनियम 2020 की धारा 4(2) और 19 के प्रावधान का पालन नहीं हुआ है.
अधिनियम के तहत अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार को होम्योपैथी में स्नातकोत्तर डिग्री का होना जरूरी है. साथ ही कम से कम 20 साल का अनुभव होना चाहिए. इसमें से कम से कम 10 साल हेल्थकेयर डिलीवरी, होम्योपैथी की बृद्धि और विकास या शिक्षा के क्षेत्र में काम किया गया हो.
-भारत एक्सप्रेस
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