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बच्चों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: राज्यों को स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों का पालन करने का दिया आदेश

महाराष्ट्र के बदलापुर में बच्चियों के साथ हुए यौन शोषण की घटना सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी स्कूलों को बच्चों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार की ओर से जारी गाइड लाइन को लागू करने का निर्देश दिया है.

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Prashant Rai Edited by Prashant Rai

महाराष्ट्र के बदलापुर में बच्चियों के साथ हुए यौन शोषण की घटना सामने आने के बाद देश भर के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों को सभी स्कूलों में लागू करने की मांग वाली याचिका का सुप्रीम कोर्ट ने निपटारा कर दिया है. कोर्ट ने अहम फैसला देते हुए देश के सभी स्कूलों को स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार की ओर से जारी गाइड लाइन को लागू करने का निर्देश दिया है.

मामले की सुनवाई के दौरान बचपन बचाओ नामक एनजीओ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एच एस फुल्का ने कोर्ट को बताया कि पांच साल पहले केंद्र सरकार ने दिशा निर्देश जारी किया था, लेकिन उस दिशा निर्देशों को अभी तक सभी राज्यों ने लागू नहीं किया है. सिर्फ पांच राज्यों ने ही लागू किया है. जिनमें से पंजाब, जम्मू कश्मीर, मध्यप्रदेश, मिजोरम और दमन एंड दीव शामिल है.

कोर्ट ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से कहा है कि वह निगरानी करें कि सभी राज्यों की ओर से दिशा निर्देश लागू किया जा रहा है या नहीं. साथ ही कोर्ट ने सभी राज्यों से NCPCR से कार्रवाई रिपोर्ट देने को कहा है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया है. याचिका में कहा गया था कि महाराष्ट्र के बदलापुर में हाल ही में हुई दुःखद घटना, जिसमें दो स्कूली छात्राओं के साथ एक स्टाफ सदस्य द्वारा कथित तौर पर बलात्कार किया गया. यह घटना आँख खोलने वाली घटना है, जो दर्शाती है कि स्कूल प्रबंधन बच्चों के जीवन की रक्षा और सुरक्षा करने में बुरी तरह विफल रहा है.

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याचिका में कहा गया था कि अगर इन दिशा निर्देशो को राज्य/केंद्र शासित प्रदेश द्वारा लागू किया गया हॉट तो कई अप्रिय घटनाओं को रोका जा सकता था. दरअसल याचिका में बच्चियों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2021 में ये दिशनिर्देश जारी किए थे जिनमें स्कूल के कर्मचारियों की जांच, स्कूल में कैमरों की निगरानी, शिक्षक और अभिभावकों की मीटिंग और सुरक्षा मापदंडों की नियमित अंतराल पर जांच शामिल है.

-भारत एक्सप्रेस



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