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राज्यों की ई-मतदाता सूची हटाने के दावे में कितनी सच्चाई? चुनाव आयोग के फैक्ट चेक में हुआ बड़ा खुलासा

लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के द्वारा गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मतदाता सूची में तथाकथित गड़बड़ी होने का दावा किया था.

Election Commission

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार.

भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission) ने शुक्रवार को उस दावे को गलत बताया, जिसमें कई राज्यों की ई-मतदाता सूची हटाने का दावा किया गया था.

राहुल गांधी ने किया था दावा

लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के द्वारा गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मतदाता सूची में तथाकथित गड़बड़ी होने का दावा किया था. उनके इस दावे के बाद एक कांग्रेस समर्थक ने मुख्य चुनाव आयोग (Election Commission) पर कई राज्यों की ई-मतदाता सूची हटाने का आरोप लगाया. लेकिन, चुनाव आयोग ने शुक्रवार को फैक्ट चेक करते हुए इसे गलत बताया.

दरअसल, कांग्रेस समर्थक अंकित मयंक, जिसके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर 88.4 हजार फॉलोअर्स हैं, ने एक पोस्ट के द्वारा दावा किया कि चुनाव आयोग ने देर रात कई राज्यों की ई-मतदाता सूची को अपनी वेबसाइट से हटा दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “चुनाव आयोग (Election Commission) ने रातों रात कई राज्यों की ई-मतदाता सूची अपनी वेबसाइट से हटा दी है. बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश- सभी हटा दिए गए. चुनाव आयोग और भाजपा इतने डरे हुए क्यों हैं?” अंकित मयंक के इस पोस्ट पर खबर लिखे जाने तक करीब 10 हजार कमेंट, तीन हजार री-पोस्ट और 2.80 लाख इंगेजमेंट आ चुके थे.

Election Commission ने दावे को किया खारिज

हालांकि चुनाव आयोग ने अंकित मंयक के दावे को गलत बताया. भारतीय चुनाव आयोग की अधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल से एक लिंक शेयर किया गया. पोस्ट में लिखा, “कोई भी व्यक्ति इस लिंक के माध्यम से 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की मतदाता सूची डाउनलोड कर सकता है.”

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उल्लेखनीय है कि बिहार में इस साल चुनाव होने हैं. चुनावी वर्ष में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध को लेकर अधिकतर विपक्षी पार्टियां लामबंद होती दिख रही हैं. लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पूर्व में कई बार कई राज्यों के विधानसभा चुनाव में वोट चोरी का दावा कर चुके हैं. इसी बीच उन्होंने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मतदाता सूची में कथित रूप से गड़बड़ी की बात दोहराई. हालांकि, चुनाव आयोग एसआईआर को एक सामान्य प्रक्रिया बता रहा है, ताकि फर्जी वोटर्स को लिस्ट से बाहर किया जा सके.

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-भारत एक्सप्रेस



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