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जिस बीमारी से हुई थी अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट की मौत, पुणे में उसका कहर… 16 वेंटिलेटर पर … अब तक 1 की मौत

महाराष्ट्र के पुणे में गिलियन-बैरे सिंड्रोम नामक बीमारी ने 100 से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है. 16 मरीज अब भी वेंटिलेटर पर है. अब GBS के कारण पहली मौत की खबर आई है. पुणे के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की इस बीमारी के कारण मौत हो गई.

सांकेतिक तस्वीर.

Pune GBS Outbreak: महाराष्ट्र के पुणे में गिलियन-बैरे सिंड्रोम नामक बीमारी ने 100 से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है. 16 मरीज अब भी वेंटिलेटर पर है. अब GBS के कारण पहली मौत की खबर आई है. पुणे के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की इस बीमारी के कारण मौत हो गई. वह व्यक्ति पुणे के डीएसके विश्वा इलाके में रहता था और कुछ दिनों से डायरिया से पीड़ित था.

हाथ-पैर नहीं हिला पा रहा था पीड़ित

पीड़ित के रिश्तेदारों ने बताया कि वह निजी दौरे पर सोलापुर जिले में अपने पैतृक गांव गया था. कमजोरी महसूस होने पर उसे सोलापुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे GBS से पीड़ित बताया. उसे आगे के इलाज के लिए ICU में शिफ्ट कर दिया गया. वह व्यक्ति अपने हाथ-पैर तक नहीं हिला पा रहा था, हालांकि वह डॉक्टरों की निगरानी में था. जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि उसका स्वास्थ्य स्थिर है और उसे शनिवार को ICU से बाहर ले जाया गया. बाद में उसे सांस लेने में तकलीफ हुई और शनिवार (25 जनवरी) को उसकी मौत हो गई.

क्या है गिलियन-बैरे सिंड्रोम

गिलियन-बैरे सिंड्रोम (Guillain-Barre Syndrome) एक रेयर ऑटोइम्यून न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसकी वजह से अचानक से सुन्नता और मांसपेशियों में कमजोरी पैदा होती है. इस स्थिति में शरीर का इम्यून सिस्टम अपने ही नर्वस पर अटैक करता है. इसके कारण लोगों को उठने बैठने और सांस लेने में तकलीफ होती है. इस बीमारी से पीड़ित को लकवा की भी समस्या हो जाती है.

पुणे पिछले कई दिनों से GBS के प्रकोप के कारण चर्चा में है. यहां संक्रमित मरीजों की संख्या 73 पहुंच चुकी है, जिनमें से 16 वेंटिलेटर पर हैं. शनिवार को GBS के नौ संदिग्ध मरीज पाए गए. पुणे नगर निगम अलर्ट मोड पर है और स्थिति से निपटने के लिए कई उपाय अपनाए हैं. पुणे नागरिक निकाय के सूत्रों के अनुसार, जीबीएस के लक्षणों में दस्त, पेट दर्द, बुखार और मतली या उल्टी शामिल हैं.

पानी उबाल कर पीएं, बासी ना खाएं

सूत्रों ने बताया कि “GBS संक्रमण दूषित पानी या भोजन का सेवन करने से हो सकता है. संक्रमण से दस्त और पेट दर्द हो सकता है. कुछ व्यक्तियों में लक्षण के 1 से 3 सप्ताह के भीतर इम्यून सिस्टम नसों पर अटैक करता है. इसके अलावा, डेंगू, चिकनगुनिया वायरस या अन्य बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण भी इम्यून सिस्टम नसों पर अटैक करता है.”

राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने एक सलाह में नागरिकों से उबला हुआ पानी पीने और खुले क्षेत्रों या बासी भोजन से बचने का आग्रह किया है. हाथ-पैर की मांसपेशियों में अचानक कमजोरी आने पर नागरिकों को पारिवारिक चिकित्सक से परामर्श लेने या नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाने को कहा गया है.

घबराएं नहीं GBS का इलाज है: स्वास्थ्य विभाग

राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि भले ही गिलियन-बैरे सिंड्रोम का सटीक कारण अभी भी अज्ञात है, लेकिन इसके लक्षण आमतौर पर श्वसन या पाचन तंत्र के संक्रमण के बाद प्रमुख हो जाते हैं. उन्होंने बताया कि बैक्टेरिया या वायरल संक्रमण, हाल ही में टीकाकरण, सर्जरी और न्यूरोपैथी से भी गिलियन-बैरे सिंड्रोम हो सकता है. उन्होंने लोगों से अपील की कि घबराएं नहीं, जीबीएस एक दुर्लभ बीमारी है और इसका इलाज संभव है.

इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पुणे में एक टीम भेजी है, जहां हाल ही में जीबीएस के प्रकोप ने शहर के सिंहगढ़ इलाके और उसके आसपास के 73 लोगों को प्रभावित किया है.


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-भारत एक्सप्रेस



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