Bharat Express DD Free Dish

ममता बनर्जी को बड़ा झटका! बागी गुट ने ठोंका TMC पर दावा, क्या छिन जाएगा ‘दीदी’ का सिंबल?

TMC crisis: पश्चिम बंगाल में TMC के भीतर जारी सियासी संघर्ष अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है. ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठन पर दावा पेश किया है.

Mamata Banerjee

TMC crisis: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा सियासी विवाद अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है. ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) के नेतृत्व वाले बागी गुट के 10 विधायक गुरुवार को नई दिल्ली स्थित भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के मुख्यालय में आयोग की फुल बेंच से मुलाकात करेंगे. इस दौरान वे पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर अपना दावा पेश करेंगे.

बागी गुट ने पहले चुनाव आयोग से मिलने का समय मांगा था, जिसे आयोग ने मंजूरी दे दी. इसके बाद सभी विधायक बुधवार शाम को कोलकाता से दिल्ली रवाना हो गए. बैठक में गुट अपने समर्थन से जुड़े दस्तावेज और कानूनी तर्क आयोग के सामने रखेगा.

पार्टी का बदला राष्ट्रीय अध्यक्ष?

22 जून को बागी गुट ने टीएमसी की नई नेशनल वर्किंग कमेटी बनाने का ऐलान किया था. इसमें 30 सदस्य शामिल किए गए, जबकि 10 सदस्यों की एक अलग उप-समिति भी बनाई गई. इसी दौरान बड़ा फैसला लेते हुए ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाने और उनकी जगह वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित करने का दावा किया गया. इसके बाद पार्टी के भीतर टकराव और बढ़ गया.

चुनाव आयोग के सामने रखे जाएंगे दस्तावेज

बागी गुट के वकील पहले ही चुनाव आयोग में जरूरी दस्तावेज और प्रस्ताव जमा कर चुके हैं. गुरुवार की सुनवाई में इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर यह साबित करने की कोशिश की जाएगी कि पार्टी पर उनका दावा ज्यादा मजबूत है.

बहुमत का दावा

बागी गुट का कहना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी के 80 विधायकों में से 60 उनके साथ हैं, जबकि 20 विधायक ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के समर्थन में हैं. इसी आधार पर वे खुद को पार्टी का असली प्रतिनिधि बता रहे हैं.


ये भी पढ़ें: AIADMK को बड़ा झटका… टूट रही पार्टी? कई पूर्व मंत्री और विधायक विजय की TVK में होंगे शामिल


चुनाव चिह्न पर क्यों है विवाद?

बागी गुट का कहना है कि चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के तहत किसी क्षेत्रीय दल को अपना चुनाव चिह्न बनाए रखने के लिए तय शर्तों को पूरा करना होता है. उनका दावा है कि उनके साथ मौजूद विधायकों को मिले वोटों का कुल आंकड़ा आयोग की निर्धारित सीमा से अधिक है. इसलिए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर उनका दावा अधिक मजबूत बनता है. अब इस पूरे मामले में चुनाव आयोग की सुनवाई और उसके बाद होने वाला फैसला टीएमसी के भीतर जारी सत्ता संघर्ष की दिशा तय कर सकता है.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read