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उज्जैन में बसंत पंचमी: महाकाल मंदिर से स्याही माता तक भक्ति और परंपरा का संगम

Ujjain Basant Panchami: धर्म नगरी उज्जैन में बसंत पंचमी का पर्व उल्लास और परंपरा के साथ मनाया गया. महाकाल मंदिर में बाबा को पंचामृत स्नान और पीले पुष्प अर्पित किए गए, वहीं शिप्रा नदी पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर सूर्य को अर्घ्य दिया.

धार्मिक नगरी उज्जैन में बसंत पंचमी का पर्व इस बार परंपरा और उत्साह के अनूठे मेल के साथ मनाया गया. सुबह-सुबह भगवान महाकाल को पंचामृत से स्नान कराकर पीले फूल, गुलाल और पीले वस्त्र अर्पित किए गए. इसी के साथ मंदिर में होली उत्सव की शुरुआत भी हो गई है. आने वाले दिनों में प्रतिदिन आरती के दौरान बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित किया जाएगा.

शिप्रा नदी पर श्रद्धालुओं की भीड़

तड़के से ही मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के घाटों पर श्रद्धालु स्नान के लिए उमड़ पड़े. भक्तों ने ठंडे जल में डुबकी लगाकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया और पूजा-अर्चना की. इस दौरान पीले वस्त्रों में सजे श्रद्धालु मां सरस्वती की आराधना में लीन दिखाई दिए. वसंत के फूलों से विद्या की देवी का अभिनंदन कर भक्तों ने ज्ञान और सफलता की कामना की.

विद्यारंभ संस्कार का महत्व

धर्माधिकारी पंडित गौरव उपाध्याय ने बताया कि बसंत पंचमी का दिन ज्ञान और विवेक की प्राप्ति के लिए बेहद शुभ माना जाता है. अवंतिका नगरी के प्रमुख मंदिरों में विशेष अनुष्ठान आयोजित किए गए. उन्होंने कहा कि इसी दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, इसलिए विद्यारंभ संस्कार का विशेष महत्व है. परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल का राजा स्वरूप में श्रृंगार कर उन्हें पीले पकवानों का भोग लगाया गया और अब होली तक प्रतिदिन गुलाल अर्पित किया जाएगा.

स्याही माता मंदिर में अनोखी परंपरा

उज्जैन की सिंहपुरी में स्थित प्राचीन स्याही माता मंदिर में भी बसंत पंचमी पर भारी भीड़ रही. यहां मां सरस्वती की लगभग 400 साल पुरानी मूर्ति विराजमान है. यह मंदिर खास इसलिए है क्योंकि यहां छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई और भविष्य की सफलता के लिए मां को पेन और स्याही अर्पित करते हैं. मंदिर पहुंची मानवी भटनागर ने बताया कि उन्होंने माता के चरणों में स्याही और सरसों के फूल चढ़ाकर श्रेष्ठ विद्या और सफलता की प्रार्थना की.

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शहरभर में उत्सव का माहौल

दिनभर उज्जैन की गलियों और घाटों पर भक्तों का उत्साह देखने को मिला. हर जगह भक्ति और विद्या का संगम नजर आया. बसंत पंचमी ने उज्जैन को एक बार फिर धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं से सराबोर कर दिया.

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-भारत एक्सप्रेस



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