MP News: मध्य प्रदेश के उज्जैन में वाकणकर ब्रिज के पास बनाए जा रहे नए पुल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. आरोप है कि पुल को पुराने पुल की सीध में बनाने के बजाय करीब 30 से 35 डिग्री तिरछा कर दिया गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा कुछ प्रभावशाली लोगों की निजी जमीन बचाने के लिए किया गया.
लंबाई और लागत में बढ़ोतरी
इस बदलाव से पुल की लंबाई लगभग 100 मीटर बढ़ गई है. रिपोर्टों के मुताबिक, परियोजना की कुल लागत करीब 64.99 करोड़ रुपए है, जिसमें पुल निर्माण पर लगभग 16.7 करोड़ रुपए खर्च होने हैं. डिजाइन बदलने से 1 से 1.5 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च आने का दावा किया जा रहा है.
स्मार्ट सिटी पार्किंग पर असर
पुल का उतराव अब उस स्मार्ट पार्किंग स्थल पर आ रहा है, जिसे चार साल पहले स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत लगभग ढाई करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया था. यदि पुल वहीं से जुड़ता है तो पार्किंग का बड़ा हिस्सा सड़क में समा जाएगा और पार्किंग की क्षमता घट जाएगी.
अधिकारियों की चुप्पी
मामले पर जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा गया लेकिन स्पष्ट कारण सामने नहीं आए. कई बार चर्चा होने के बावजूद ठोस जानकारी नहीं दी गई. वहीं मध्यप्रदेश सेतु निगम के मुख्य अभियंता गोपाल सिंह ने कहा कि उन्हें अभी पूरी जानकारी नहीं है. उन्होंने आश्वासन दिया कि वे खुद उज्जैन जाकर पुल का निरीक्षण करेंगे और फिर ही टिप्पणी करेंगे.
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तकनीकी जरूरत या निजी हित?
नया पुल लगभग 240 मीटर लंबा और 12 मीटर चौड़ा बनाया जा रहा है. लेकिन अब सवाल यह है कि पुल की दिशा बदलना तकनीकी आवश्यकता थी या फिर किसी खास हित को ध्यान में रखकर ऐसा किया गया. इस विवाद ने प्रशासनिक पारदर्शिता और निर्माण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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