संसद के मानसून सत्र में सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में वंदे मातरम बिल पेश करेंगे. इस प्रस्तावित कानून का मकसद राष्ट्रीय गीत को वही दर्जा और सुरक्षा देना है जो अभी राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ को मिली हुई है.
कानूनी बदलाव का उद्देश्य
अगर यह बिल पास होता है तो राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम एक्ट में संशोधन होगा. इसके बाद वंदे मातरम का अपमान करना भी अपराध माना जाएगा और इसे राष्ट्रीय गान के बराबर कानूनी सुरक्षा मिलेगी.
सजा का प्रावधान
नए कानून में साफ तौर पर कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत का अपमान करता है या उसके गाने में बाधा डालता है तो उसे तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.
मौजूदा कानून और बदलाव
अभी तक यह प्रावधान केवल राष्ट्रीय गान के लिए लागू है. राष्ट्रीय गान गाते समय खड़ा होना जरूरी है और उसके अपमान या गाने में रुकावट डालने पर सजा का प्रावधान है. प्रस्तावित बदलाव से यही नियम वंदे मातरम पर भी लागू होंगे.
राष्ट्रीय प्रतीकों की सुरक्षा
अगर संसद के दोनों सदन इस बिल को मंजूरी देते हैं तो वंदे मातरम का अपमान करना क्रिमिनल ऑफेंस बन जाएगा. इससे राष्ट्रीय गीत भी उसी कानूनी दायरे में आ जाएगा, जिसमें राष्ट्रीय गान, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान आते हैं.
मंत्रालय का निर्देश
यह कदम गृह मंत्रालय के हालिया आदेश के बाद आया है. 9 जुलाई को मंत्रालय ने सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि सरकारी कार्यक्रमों में जब भी जन गण मन गाया जाए, उससे पहले वंदे मातरम बजाया जाए.
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संसद में चर्चा
इस प्रस्तावित कानून पर मानसून सत्र के दौरान संसद में बहस होने की उम्मीद है. अगर यह पास हो जाता है तो वंदे मातरम को पहली बार राष्ट्रीय गान जैसी कानूनी सुरक्षा मिलेगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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