Durga Puja controversy: कोलकाता के भवानीपुर 75 पल्ली दुर्गा पूजा पंडाल में इस बार कुछ ऐसा हुआ जिसने लाखों हिंदू समाज के लोगों को भीतर तक झकझोर दिया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पंडाल का उद्घाटन किया, तालियां बजाईं. वहीं उनके करीबी नेता मदन मित्रा मंच पर गाते हुए कहा कि मेरे दिल में काबा है और आँखों में मदीना है.
CM Mamata Banerjee claps while her toadie Madan Mitra sings “…there’s Kaba in my heart and Medina in my eyes” inside a Durga Puja pandal in Kolkata, West Bengal.
This is how Sanatan Dharma and Sanatani beliefs are trampled upon in West Bengal. Sadly not a whimper of protest. pic.twitter.com/lnkZDkNEi0
— Kanchan Gupta 🇮🇳 (@KanchanGupta) September 27, 2025
मुद्दे की बात
अब सवाल ये उठता है कि दुर्गा पूजा जैसे सनातन पर्व पर इस तरह के गीतों का क्या काम? क्या ये जानबूझकर सनातन भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश नहीं है? क्या ये एक सांस्कृतिक अतिक्रमण नहीं है जहां देवी दुर्गा की आराधना के बीच इस्लामी प्रतीकों की बात की जा रही है?
वोट के लिए आस्था से खिलवाड़
ममता बनर्जी का ये कदम कोई पहली बार नहीं है. इससे पहले भी उन्होंने पितृ पक्ष के दौरान दुर्गा पूजा पंडालों का उद्घाटन कर हिंदू परंपराओं को नजरअंदाज किया था. जबकि शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष में कोई नया कार्य या उत्सव शुरू करना अशुभ माना जाता है लेकिन बंगाल की राजनीति में वोट बैंक की मजबूरी शायद आस्था से बड़ी हो गई है.
सबसे बड़ी चिंता की बात तो ये है कि इस सबके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठती है. न कोई बड़ा संत बोलता है, न कोई संगठन सड़कों पर उतरता है. सोशल मीडिया पर कुछ लोग जरूर नाराजगी जताते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर विरोध न के बराबर है.
पश्चिम बंगाल में सनातन धर्म ना के बराबर
क्या बंगाल में सनातन धर्म अब सिर्फ एक मौन दर्शक बनकर रह गया है? क्या दुर्गा पूजा जैसे पर्व अब राजनीतिक मंच बनते जा रहे हैं जहां देवी की आराधना से ज़्यादा नेताओं की पीआर चलती है?
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अगर अब भी हम चुप रहे, तो आने वाले वर्षों में दुर्गा पूजा में देवी के स्थान पर कोई और प्रतीक खड़ा मिलेगा. ये समय है जागने का, बोलने का और अपनी आस्था की रक्षा करने का वरना इतिहास हमें माफ नहीं करेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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