EC may introduce new verification rule: पश्चिम बंगाल की सियासत में आज का दिन सबसे बड़ा होने वाला है. भारत निर्वाचन आयोग आज शाम 4 बजे विज्ञान भवन में एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रहा है, जिसमें बंगाल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीखों का आधिकारिक ऐलान होगा. सूत्रों की मानें तो बंगाल में इस बार 3 से 4 चरणों में वोटिंग हो सकती है, जो अप्रैल के आखिरी हफ्ते से शुरू होकर मई के पहले सप्ताह तक चलेगी.
लेकिन इस बार चर्चा सिर्फ तारीखों की नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग के उस ‘सीक्रेट प्लान’ की है जो पोलिंग बूथों पर फर्जी वोटिंग की जड़ों पर चोट करने वाला है. आयोग एक ऐसे प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है जो बंगाल के चुनावी इतिहास में पहली बार देखने को मिलेगा.
बूथ के बाहर वेरिफिकेशन की नई तैयारी?
आयोग जिस नए प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, वह पोलिंग बूथों के बाहर का नजारा पूरी तरह बदल सकता है. इसके तहत अब उन महिलाओं के लिए मतदान की प्रक्रिया थोड़ी अलग होगी जो बुर्का, घूंघट या स्कार्फ से अपना चेहरा ढककर वोट डालने आती हैं. अब तक की व्यवस्था में ऐसी महिलाएं सीधे पोलिंग बूथ के अंदर जाती थीं और वहीं उनकी पहचान की जांच होती थी, लेकिन इस बार बूथ के बाहर ही एक ‘स्पेशल वेरिफिकेशन काउंटर’ बनाने की तैयारी है.
इस काउंटर पर केवल महिला कर्मचारी और आंगनवाड़ी सेविकाएं तैनात रहेंगी, जो मतदान केंद्र के अंदर घुसने से पहले ही महिला वोटर का चेहरा देखकर उनके आईडी कार्ड से मिलान करेंगी. सुरक्षा के लिहाज से वहां केंद्रीय सुरक्षा बल (CAPF) के जवान भी तैनात रहेंगे, ताकि किसी भी तरह की धांधली या दबाव की गुंजाइश न बचे.
फर्जी वोटिंग पर लगेगी लगाम
प्रशासन का मानना है कि इस कदम से न केवल फर्जी मतदान पर लगाम लगेगी, बल्कि वोटिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता भी आएगी. अक्सर चुनावों के बाद यह आरोप लगते हैं कि चेहरा ढका होने का फायदा उठाकर गलत तरीके से वोट डाले गए, ऐसे में बूथ के बाहर की यह चेकिंग एक पुख्ता दस्तावेजी रिकॉर्ड तैयार करेगी जिसे जरूरत पड़ने पर कोर्ट में भी सबूत के तौर पर पेश किया जा सकेगा.
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर कानूनी गलियारों में बहस भी छिड़ गई है क्योंकि चुनाव के पुराने नियमों में इस तरह की ‘बाहरी जांच’ का कोई साफ जिक्र नहीं है. लेकिन आयोग अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इसे बंगाल में प्रशासनिक निर्देश के तौर पर लागू कर सकता है.
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सरकार और आयोग के बीच भरोसे की कमी
यह पूरी कवायद ऐसे समय में हो रही है जब चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच पहले से ही तनातनी का माहौल है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी दोनों पक्षों के बीच ‘भरोसे की कमी’ का जिक्र किया था. आयोग ने राज्य प्रशासन पर पहले भी चुनाव ड्यूटी में बाधा डालने के आरोप लगाए हैं, ऐसे में यह नया नियम राजनीतिक तापमान को और ज्यादा बढ़ा सकता है. अब सबकी नजरें शाम 4 बजे होने वाली घोषणा पर टिकी हैं, जहां यह साफ हो जाएगा कि बंगाल में लोकतंत्र का यह महापर्व किस तारीख से शुरू होगा और क्या वाकई बुर्का-घूंघट वाली महिलाओं के लिए यह नया नियम आज से ही लागू कर दिया जाएगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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