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‘ममता दीदी के लोग बनवाते थे कागज, बदले में मांगते थे वोट…’! ऑन-कैमरा रोते हुए अवैध घुसपैठियों ने खोल दी TMC राज की पोल

पश्चिम बंगाल में नई सरकार के सख्त अभियान के बाद अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई तेज होने का दावा किया जा रहा है. कुछ लोगों ने मीडिया के सामने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और सरकारी योजनाओं में शामिल किए जाने के आरोप लगाए हैं…

West Bengal illegal infiltration action: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन होते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार ने अवैध घुसपैठियों के खिलाफ ऐसा भयंकर और कड़ा चक्रव्यूह रच दिया है, जिसने पिछले 15 सालों के ‘वोट बैंक’ साम्राज्य को हिलाकर रख दिया है.

दरअसल सरकार बनते ही राज्य में ‘3D पॉलिसी’ यानी डिटेक्ट (पहचान), डिलीट (नाम हटाना) और डिपोर्ट (देश से निकालना) को लागू कर दिया गया है. इस कड़े एक्शन(Bengal Illegal Immigration on Border) का असर यह हुआ है कि बंगाल के विभिन्न कोनों में छिपे बैठे बांग्लादेशी घुसपैठिए अब खुद ही अपना झोला-बोरी समेटकर वापस भागने लगे हैं.

यही नहीं उत्तर 24 परगना के हाकिमपुर बॉर्डर पर सैकड़ों की तादाद में अवैध बांग्लादेशी नागरिक सीमा पार करने के लिए बीएसएफ (BSF) के चेक पोस्ट पर कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं, और जाते-जाते पिछली ममता सरकार के वो काले कारनामे उजागर कर रहे हैं जिसे देखकर देश दंग रह गया है.

 

ऑन-कैमरा घुसपैठियों ने कबूला TMC का अहसान

बॉर्डर पर खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे इन घुसपैठियों ने मीडिया के सामने खुलकर यह कबूल किया है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उन्हें भारत के फर्जी दस्तावेज मुहैया कराने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी. वहीं एक महिला ने रोते हुए बताया कि ममता दीदी के नेताओं ने स्कूल और ऑनलाइन माध्यमों से उनके आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर कार्ड चुटकियों में तैयार करवा दिए थे.

सिर्फ इतना ही नहीं, कथित तौर पर इन अवैध घुसपैठियों को पश्चिम बंगाल सरकार की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना में भी शामिल किया गया था, जिसके तहत उन्हें हर महीने मुफ्त का पैसा और सरकारी राशन मिल रहा था. इसके बदले में टीएमसी के सिंडिकेट ने उनसे केवल एक ही सौदा किया था कि ‘चुनाव में सिर्फ और सिर्फ तृणमूल कांग्रेस को ही वोट देना है.’

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40 साल से रह रहे घुसपैठियों में मची भगदड़

इस पूरी ग्राउंड रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा (Bengal Illegal Immigration on Border) यह हुआ है कि कई घुसपैठिए पिछले 10 से लेकर 40 सालों तक फर्जी और जालसाजी से बने दस्तावेजों के दम पर मजे से बंगाल में रह रहे थे और पिछली सरकार की नाक के नीचे देश के संसाधनों को दीमक की तरह चाट रहे थे. एक अन्य शख्स ने बताया कि ममता बनर्जी के राज में उन्हें कोई छूने वाला भी नहीं था, लेकिन जैसे ही नई सरकार आई, पूरे राज्य में दस्तावेजों की सघन स्क्रूटनी शुरू हो गई.

 

प्रशासन ने सख्त आदेश जारी किया है कि यदि कोई मकान मालिक किसी अवैध बांग्लादेशी को अपने घर में पनाह देगा, तो उसे 2 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना और 2 साल की जेल भुगतनी होगी. इस खौफ के कारण मकान मालिकों ने घुसपैठियों को धक्के मारकर बाहर निकालना शुरू कर दिया है, जिससे अब वे अकेले या पूरे परिवार के साथ भागने पर मजबूर हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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