Bengal Election Results 2026: दो चरणों में हुए भारी मतदान के बाद पश्चिम बंगाल में परिणाम की घड़ी आ गई है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, BJP को प्रदेश में बहुमत मिल रहा है. ममता बनर्जी की 15 साल की सत्ता गिर रही है. इन चुनावों में न सिर्फ बीजेपी ने टीएमसी के किले को ध्वस्त किया है बल्कि नक्लसवाद के गले में भी नकेल कसी है.
देश के गृहमंत्री अमित शाह ने कुछ साालों पहले नक्सलवाद के खात्मे की कसम खाई थी. अब पश्चिम बंगाल चुनाव के परिणाम के साथ ही उसके जन्म स्थान पर भी बीजेपी ने भगवा झंडा फहरा दिया है. क्योंकि माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी में भाजपा ने जीत हासिल की है.
पश्चिम बंगाल की माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी (Matigara-Naxalbari) वही इलाका है जहां से साल 1967 लाल आतंक का जन्म हुआ. कई साल तक इसने भारत के सीने को छलनी किया. खैर अब बीजेपी ने यहां अपना राष्ट्रवादी भगवा किला बनाना शुरू कर दिया है.
नक्सलवाद की जमीन पर भगवा का उदय
दार्जिलिंग जिले की माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट महज एक चुनावी क्षेत्र नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति का एक ऐतिहासिक अध्याय है. यह वही धरती है जहां 1967 में सशस्त्र नक्सलवादी आंदोलन की चिंगारी सुलगी थी, जिसने पूरे देश की सियासत को हिलाकर रख दिया था. हालांकि, समय का पहिया ऐसा घूमा कि आज यहां की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है.
ताजा चुनावी रुझानों में भाजपा के आनंदमय बर्मन ने करीब 64,420 वोटों की विशाल बढ़त बनाकर एकतरफा माहौल कर दिया है. कभी वामपंथ का गढ़ रहे इस इलाके में अब टीएमसी के शंकर मालाकार और सीपीआईएम के झरेन रॉय जैसे धुरंधर भी भाजपा की इस लहर के सामने बेबस नजर आ रहे हैं.
पिछले 10 साल के नतीजे
पिछले 15 सालों के आंकड़ों को देखें तो माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट का सियासी मिजाज 180 डिग्री घूम चुका है. साल 2011 और 2016 तक यह क्षेत्र कांग्रेस का मजबूत किला हुआ करता था, जहां शंकर मालाकार का एकछत्र राज था.
लेकिन 2021 के चुनावों ने सारी पुरानी परंपराएं तोड़ दीं, जब भाजपा के आनंदमय बर्मन ने रिकॉर्ड 70,848 वोटों के अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज की. धीरे-धीरे वामपंथ और कांग्रेस का पारंपरिक जनाधार पूरी तरह खिसक गया और आज यह सीट भाजपा के सबसे अभेद्य दुर्गों में से एक बन चुकी है.
शाह की 31 मार्च 2026 वाली डेडलाइन का चुनावी असर
पश्चिम बंगाल के चांदीपुर में चुनावी रैली के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने दहाड़ते हुए कहा था, “भाजपा ने देश को आतंकवाद और नक्सलवाद से मुक्त किया है, और अब हम बंगाल को घुसपैठियों से भी मुक्त कराएंगे.” शाह का यह आत्मविश्वास अकारण नहीं था.
गौरतलब है कि उन्होंने देश से नक्सलवाद को पूरी तरह जड़ से खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 की एक सख्त डेडलाइन तय की थी. इस लक्ष्य का ऐलान मुख्य रूप से फरवरी 2025 में सुरक्षा बलों के बड़े अभियानों के दौरान किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत को नक्सली हिंसा से पूरी तरह मुक्त करना था.
आज जब बंगाल के चुनावी नतीजे सामने आ रहे हैं, तो ऐसा लगता है कि नक्सलवाद के खिलाफ उनकी यह रणनीति अब चुनावी नतीजों में भी अपना असर दिखा रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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