Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

मां दुर्गा के दिव्य आयुध: संसार में कोहराम मचाने वाले महिषासुर के संहार के लिए किस देव ने इनको कौन-सा अस्त्र दिया? जानिए

Maa Durga weapons to kill Mahishasura: महिषासुर वध के लिए मां दुर्गा को परमेश्‍वर शिवजी ने त्रिशूल, विष्णुजी ने चक्र और इंद्रदेव ने वज्र प्रदान किया. यहां जानिए देवताओं द्वारा सौंपे गए दिव्य अस्त्र-शस्त्रों का पौराणिक ब्‍यौरा.

maa durga weapons story

मां दुर्गा के 10 प्रचंड अस्त्र

सनातन परंपरा में मां दुर्गा को आदिशक्ति, अदम्य साहस और आसुरी वृत्तियों पर धर्म की विजय का प्रतीक माना गया है. लाखों वर्ष पहले जब महिषासुर के आतंक से त्रिलोकी त्राहि-त्राहि कर उठी और देवता स्वर्ग से बेदखल हो गए, तब सभी देवताओं के सम्मिलित तेज से मां भगवती का प्राकट्य हुआ था. महिषासुर का वध करने के लिए समस्त देवताओं ने देवी को अपने-अपने परम दिव्य अस्त्र-शस्त्र और शक्तियां समर्पित कीं. देवी के हाथों में सुशोभित ये आयुध मात्र युद्ध के हथियार नहीं हैं, बल्कि वे जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक संदेश और धर्म की रक्षा के प्रतीक हैं.

भगवान शिव का त्रिशूल: सत्व, रज और तम पर नियंत्रण

भगवान शिव ने अपने प्रमुख आयुध ‘त्रिशूल’ से एक त्रिशूल प्रकट कर मां दुर्गा को भेंट किया. त्रिशूल सृष्टि के तीन मूलभूत गुणों- सत्व, रज और तम का प्रतिनिधित्व करता है. मां दुर्गा के हाथ में त्रिशूल अधर्म, अन्याय और तमोगुणी वृत्तियों के संपूर्ण विनाश का प्रतीक है. यह संकेत देता है कि जब मनुष्य अपनी तामसिक प्रवृत्तियों पर विजय पाता है, तभी सद्गुणों और धर्म की प्रतिष्ठा होती है.

भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र और देवराज इंद्र का वज्र

सृष्टि के पालनकर्ता भगवान श्रीहरि विष्णु ने अपने चक्र से एक अमोघ ‘सुदर्शन चक्र’ उत्पन्न कर देवी को सौंपा. सुदर्शन चक्र कालचक्र, निरंतर गतिशीलता और दुष्ट शक्तियों के तात्कालिक अंत का द्योतक है. वहीं देवराज इंद्र ने अपने वज्र से एक अन्य ‘वज्र’ और अपने ऐरावत हाथी से एक दिव्य घंटा देवी को प्रदान किया. वज्र आत्मा की अटूट शक्ति, दृढ़ संकल्प और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है.

वरुण देव का शंख और पवन देव का धनुष-बाण

जल के देवता वरुण देव ने मां दुर्गा को पावन ‘शंख’ भेंट किया, जिसकी दिव्य ध्वनि अधर्म के विरुद्ध युद्ध का शंखनाद और अंतरात्मा की जागृति का प्रतीक है. पवन देव ने देवी को तीक्ष्ण बाणों से भरा तरकश और ‘धनुष’ समर्पित किया. धनुष-बाण एकाग्रता, लक्ष्य संधान और विपरीत परिस्थितियों में सटीक निर्णय लेने की क्षमता को दर्शाते हैं.

खड्ग (तलवार), गदा और अन्य दिव्य उपहार

मां दुर्गा के हाथों में चमकती तीक्ष्ण ‘खड्ग’ (तलवार) अज्ञान, मोह और अंधकार को काटकर विशुद्ध ज्ञान और विवेक के प्रकाश की स्थापना का प्रतीक है. वहीं यमराज द्वारा दिया गया कालदंड और कुबेर की ‘गदा’ असीम बल, न्याय और अनुशासन को रेखांकित करती है. इसके साथ ही गिरिराज हिमालय ने मां दुर्गा को उनकी शक्ति और निर्भयता के अनुरूप सिंह (शेर) की सवारी भेंट की.

ये भी पढ़ें-वैशाली कालीबाड़ी में 33वें शारदीय दुर्गोत्सव की धूम, गाजियाबाद में बंगाली संस्कृति और भक्ति का संगम

अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित देवी ने महिषासुर मारा

समस्त देवताओं की ऊर्जा और आयुधों से सुसज्जित होकर मां दुर्गा ने रणभूमि में महिषासुर की विशाल सेना और उसके सेनापतियों का संहार किया. जब महिषासुर ने रूप बदलकर छलपूर्वक प्रहार करने का प्रयास किया, तब देवी ने अपने त्रिशूल और खड्ग के अचूक वार से उसका वध कर दिया. महिषासुर-मर्दिनी का यह स्वरूप स्पष्ट करता है कि जब समाज या व्यक्ति के भीतर अहंकार और अन्याय अपनी सीमा लांघ जाता है, तब संगठित सामूहिक चेतना और आत्मिक शक्ति ही उसका समूल नाश करती है.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital