लोकनायक जयप्रकाश राष्ट्रीय कला एवं संस्कृति प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित दो दिवसीय “Global Educulture Conclave 2026” का पहला दिल्ली संस्करण अत्यंत उत्साह, गरिमा और गहन बौद्धिक विमर्श के साथ दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित ‘द अशोक होटल’ में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. “Reimagining Human Futures” तथा “मानव भविष्य का पुनरावलोकन-एक नई वैचारिक यात्रा का शुभारंभ” की व्यापक अवधारणा पर केंद्रित इस सम्मेलन ने शिक्षा और संस्कृति के बीच एक नए संवाद की आवश्यकता को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच पर प्रभावशाली ढंग से रेखांकित किया.
देश-विदेश से 500 से अधिक प्रतिभागियों की रही उपस्थिति
दो दिवसीय सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित कुल आठ महत्वपूर्ण सत्रों में देश-विदेश के 30 से अधिक प्रख्यात विद्वानों, नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, संस्कृतिकर्मियों, कलाकारों, कुलपतियों, विश्वविद्यालय प्रशासकों, नौकरशाहों, प्राध्यापकों और युवा प्रतिनिधियों ने सहभागिता की. कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया, चीन, यूरोप सहित विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने सम्मेलन को वैश्विक परिप्रेक्ष्य प्रदान किया. लगभग 500 से अधिक प्रतिभागियों और प्रतिनिधियों की सहभागिता ने इस नवाचारपूर्ण वैचारिक पहल के प्रति व्यापक उत्साह और समर्थन को स्पष्ट किया.
“Educulture राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मूल आत्मा है” -डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’
सम्मेलन के प्रमुख अतिथियों और विशिष्ट वक्ताओं ने Educulture की अवधारणा को समय की आवश्यकता बताते हुए इसकी नई वैचारिक दृष्टि की मुक्तकंठ से सराहना की. पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपने संबोधन में कहा कि Educulture की अवधारणा भारतीय शिक्षा-दृष्टि और राष्ट्रीय शिक्षा नीति की व्यापक आत्मा से जुड़ती है. उन्होंने कहा कि शिक्षा में व्यापक, मानवीय और मूल्यपरक बदलाव लाने के लिए ऐसी समन्वित दृष्टि एक प्रभावी माध्यम बन सकती है. उनके अनुसार शिक्षा को केवल ज्ञान और कौशल तक सीमित रखने के बजाय उसे संस्कृति, संवेदना, सृजनात्मकता और मानवीय मूल्यों से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है.
“यह आने वाले समय का महत्वपूर्ण सांस्कृतिक अभियान बनेगा” – राम बहादुर राय
वरिष्ठ पत्रकार, चिंतक और पद्मभूषण से सम्मानित श्री राम बहादुर राय ने Educulture की इस नई दृष्टि की विशेष रूप से प्रशंसा करते हुए इसे आने वाले समय का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक अभियान बताया. उन्होंने शिक्षा और संस्कृति को एक साथ लेकर चलने की इस परिकल्पना को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की नवोन्मेषी और परिवर्तनकारी दृष्टि से जोड़ते हुए कहा कि समाज और मनुष्य के भविष्य के पुनर्निर्माण के लिए ऐसे नए वैचारिक प्रयोगों की आवश्यकता है. उन्होंने इस पहल को केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक-सांस्कृतिक संवाद के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया.
वैश्विक परिप्रेक्ष्य और अंतरराष्ट्रीय समर्थन
पोलैंड से जुड़ीं सांस्कृतिक संस्थान की निदेशक एवं राजनयिक प्रतिनिधि ने Educulture की अवधारणा को वैश्विक परिदृश्य से जोड़ते हुए कहा कि यह विचार राष्ट्रीय सीमाओं से परे जाकर विभिन्न संस्कृतियों और ज्ञान परंपराओं के बीच एक नए सांस्कृतिक संश्लेषण की संभावना प्रस्तुत करता है. उन्होंने कहा कि भारतभूमि से उभर रही यह दृष्टि नई अवश्य है, किंतु अत्यंत सारगर्भित है और वैश्विक स्तर पर शिक्षा, संस्कृति तथा मानवीय भविष्य के प्रश्नों पर एक सार्थक संवाद का आधार बन सकती है.
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और तकनीक के दौर में मानवीय मूल्यों का विमर्श
सम्मेलन में उपस्थित अनेक विद्वानों और विशेषज्ञों ने भी सम्मेलन की विषय-वस्तु, इसकी रूपरेखा और Educulture की समन्वित दृष्टि की सराहना की. वक्ताओं ने कहा कि तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तेजी से प्रभावित होते वर्तमान समय में, जब मनुष्य के सामने पहचान, संवेदना, नैतिकता और मानवीय संबंधों से जुड़े नए प्रश्न खड़े हो रहे हैं, तब शिक्षा और संस्कृति का यह साझा विमर्श मानवता के नए विकास की एक महत्वपूर्ण आशा के रूप में सामने आया है. उन्होंने इस विचार को संस्थागत, शैक्षणिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक रूप से आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया.
Educulture मैगजीन व पुस्तकों का विमोचन
सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों में Educulture Magazine का लोकार्पण विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा. इस अवसर पर अन्य महत्वपूर्ण पुस्तकों का भी विमोचन किया गया. इन प्रकाशनों के माध्यम से Educulture की वैचारिक अवधारणा को अकादमिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श के व्यापक दायरे तक पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई.
Global Educulture Excellence Awards 2026 की घोषणा
कार्यक्रम के प्रथम दिवस के अंतिम सत्र में आयोजित भव्य “Global Educulture Excellence Awards 2026” में शिक्षा, संस्कृति, प्रशासन और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विश्वविद्यालयों, संस्थानों और विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया:
Global Educulture NextGen University Award: मोहाली स्थित CGC University
Global Educulture Excellence Award: देवभूमि यूनिवर्सिटी, उत्तराखंड (Devbhoomi University)
प्रशासनिक व सार्वजनिक सेवा सम्मान: डॉ. रश्मि सिंह (सचिव, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय) तथा श्री विनीत विनायक (एडीजी, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, भारत सरकार)
शैक्षणिक संस्थान सम्मान: मिरांडा हाउस (दिल्ली विश्वविद्यालय)
सांस्कृतिक संस्था सम्मान: TRUST Theatre (दिल्ली)
उत्कृष्ट शिक्षाविद् सम्मान: प्रो. सौमेंद्र मोहन पटनायक
विशेष सम्मान व जूरी सदस्य: वरिष्ठ कलाकार पद्मश्री श्याम शर्मा एवं श्री त्रिभुवन देव
इसके अतिरिक्त, पिछले एक माह से निरंतर आयोजित ऑनलाइन “Change Makers of India” प्रतियोगिता (निबंध एवं 1-मिनट वीडियो) में भाग लेने वाले विभिन्न विश्वविद्यालयों के युवाओं को विशेष रूप से सम्मानित करते हुए प्रथम Educulture Brand Ambassadors के रूप में प्रतिष्ठित किया गया.
चंडीगढ़ और पटना में आयोजित होंगे अगले संस्करण
लोकनायक जयप्रकाश राष्ट्रीय कला एवं संस्कृति प्रतिष्ठान के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद ओझा ने अपने संबोधन में कहा कि Educulture की अवधारणा आज के समय की वास्तविक आवश्यकता है. उन्होंने “शिक्षा में संस्कृति और संस्कृति में शिक्षा” की अवधारणा को विस्तार देते हुए कहा कि भविष्य की पीढ़ियों के निर्माण के लिए ज्ञान के साथ संवेदना, तकनीक के साथ नैतिकता और आधुनिकता के साथ सांस्कृतिक चेतना का समन्वय आवश्यक है.
उन्होंने सम्मेलन में सहभागी सभी विद्वानों, वक्ताओं और युवा प्रतिभागियों को Educulture के प्रथम Brand Ambassadors घोषित करते हुए इस वैचारिक अभियान को देश के विभिन्न हिस्सों तक ले जाने का संकल्प जताया. उन्होंने घोषणा की कि Global Educulture Conclave का अगला संस्करण चंडीगढ़ और उसके बाद पटना में आयोजित करने की तैयारी की जाएगी.
मूर्धन्य विद्वानों का वैचारिक योगदान
सत्रों के दौरान देश के शीर्ष विद्वानों ने विभिन्न ज्वलंत विषयों पर अपने विचार रखे:
आचार्य नंद किशोर: विज्ञान, तकनीकी, शिक्षा और मनुष्य की सांस्कृतिक पहचान के संकट को नए अर्थ-संदर्भों में निरूपित किया.
उदयन वाजपेयी (कला समीक्षक): कला और डिजाइन के अंतर्संबंध पर मनुष्य की रचनात्मक प्रक्रिया के संदर्भ में भविष्य की संभावनाओं को रेखांकित किया.
प्रो. अंबिका दत्त शर्मा: सामाजिक न्याय की मूल अवधारणा को न्याय से विधि तक के सूत्रों में विस्तार देते हुए शिक्षा-संस्कृति के व्यापक अर्थ में परिभाषित किया.
श्री माखनलाल (इतिहासकार): सामाजिक न्याय को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य दिया और हमारे इतिहास बोध के मूल आशय को अनेकानेक अर्थों में चुनौती दी.
प्रोफेसर चंदन कुमार: तकनीक को मनुष्यता की प्रगति का एक अटूट और निष्पक्ष माध्यम मानते हुए राष्ट्र के विकास में एक सकारात्मक दृष्टि माना.
प्रोफेसर रामनाथ झा: मनुष्य के समक्ष उपस्थित तकनीकी और अवमूल्यन की चुनौतियों को दर्शन की दृष्टि में एक क्रमिक विकास यात्रा कहा.
डॉ. पुष्कर मिश्रा: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानवता और एल्गोरिदम जैसे विचार बिंदुओं की समाजशास्त्रीय व्याख्या की.
डॉ. ज्योतिष जोशी: सत्र के प्रारंभ में सम्मेलन के मूल उद्देश्य, परिकल्पना, प्रारूप और शिक्षा-संस्कृति के ज्ञानात्मक व प्रक्रियात्मक पक्षों पर गहरी दृष्टि रखी.
प्रतिष्ठान के पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस कार्यक्रम में प्रतिष्ठान के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री हेमंत शेष, कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. ज्योतिष जोशी, महासचिव व कार्यक्रम के निदेशक अरविंद ओझा, राष्ट्रीय सचिव प्रो. दयाशंकर तिवारी, संस्कृति सचिव धर्मेंद्रनाथ ओझा, प्रबंध निदेशक साधन राणा, सह-सचिव श्रीराम तिवारी, मुख्य सलाहकार डॉ. अमरेंद्र पाणी, श्री दिग्विजय पांडेय, डॉ. विजय मिश्रा और सौरभ सिंह सहित प्रतिष्ठान से जुड़े अनेक पदाधिकारी एवं सहयोगी उपस्थित रहे.
Global Educulture Conclave 2026 ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि भविष्य की शिक्षा केवल रोजगार और तकनीकी दक्षता का माध्यम नहीं हो सकती. शिक्षा मनुष्य को सक्षम बनाए और संस्कृति उसे सार्थक बनाए—इन्हीं दोनों के रचनात्मक संवाद से भविष्य के विवेकशील, संवेदनशील और जिम्मेदार मनुष्य का निर्माण संभव है.
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