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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटरों को दी बड़ी राहत

जिनकी सेवायें 10 वर्ष की पूर्ण हो चुकी है, प्रथम प्रोन्नति वेतनमान ग्रेड-पे 4200 रूपये का देने के सम्बन्ध में 03 माह में कानून के तहत पुलिस तकनीकी सेवायें मुख्यालय उत्तर प्रदेश को स्पष्ट आदेश पारित करें।

Allahabad High Court

उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों ललितपुर, झॉसी, मऊ, आजमगढ़, भदोही, जौनपुर, कौशाम्बी, प्रयागराज, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, मुजफफरनगर, मेरठ, आगरा, कानपुरनगर, बरेली, मुरादाबाद, गोरखपुर, वाराणसी, अलीगढ़, बुलन्दशहर एवं हापुड़ में कार्यरत 2014 बैच के कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए एवं वर्तमान समय में कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-बी के पद पर कार्यरत कम्पयूटर ऑपरेटरों को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है.

computer Opretors को दी बड़ी राहत

कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग के आलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन पुलिस कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-बी की ट्रेनिंग की अवधि को सेवा में जोड़ा जाए. साथ ही कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए के पद पर नियुक्ति हुये पुलिस कर्मियों जिनकी सेवायें 10 वर्ष की पूर्ण हो चुकी है, प्रथम प्रोन्नति वेतनमान ग्रेड-पे 4200 रूपये का देने के सम्बन्ध में 03 माह में कानून के तहत पुलिस तकनीकी सेवायें मुख्यालय उत्तर प्रदेश को स्पष्ट आदेश पारित करें.

वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम ने दिया शासनादेशों का हवाला

यह आदेश जस्टिस अजीत कुमार ने कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-बी विवेक राज मिश्रा व 84 अन्य द्वारा योजित की गयी याचिका को निस्तारित करते हुये वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम की बहस सुनकर पारित किया.

याचियों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम एवं अतिप्रिया गौतम ने बहस की. उनका तर्क था कि हाईकोर्ट के पहले के आदेशों और बाद में जारी शासनादेशों के बावजूद विभाग कुछ नहीं कर रहा. प्रशिक्षण अवधि की सेवा को प्रथम प्रोन्नत वेतनमान देने के लिए नहीं जोड़ा जा रहा है ,जबकि वे इसके हकदार है.

10 वर्ष की सेवा पूरा करने वाले ग्रेड पे के हकदार

याचीगणों की नियुक्ति वर्ष 2014 में कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए के पद पर हुई थी, तत्पश्चात् याचीगणों को वर्ष 2024 में कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-बी के पद पर पदोन्नति प्रदान की गई. सभी याचीगण अपनी सेवायें 10 वर्षों से ज्यादा की पूर्ण कर चुके है, लेकिन उन्हें प्रथम वेतनमान ग्रेड पे 4200/- रूपये नहीं दिया जा रहा है और न ही उनके ट्रेनिंग अवधि को सेवा में जोड़ा गया.

शासनादेश दिनांक 05.11.2014 में यह व्यवस्था प्रतिपादित की गयी है कि ऐसे राज्य कर्मचारी जिन्हें सीधी भर्ती के पद पर प्रथम नियुक्ति की तिथि से 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर ली है, उन्हें प्रथम वेतनमान / ग्रेड पे प्रदान किया जायेगा.

वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि अपर पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद द्वारा जारी सरकुलर दिनांक 17.03.2012 मेंयह स्पष्ट उल्लिखित किया गया है कि पुलिस बल के कार्यकारी बल में ग्रेड वेतन 2800/- रूपया एवं ग्रेड वेतन 4800/- के पद उपलब्ध नहीं है, अर्थात उक्त दोनों ग्रेड वेतन नॉन फंक्शनल वेतनमान के है.

पुलिस मुख्यालय से जारी शासनादेश एवं सर्कुलर याचियों के पक्ष में

सभी याचीगण वर्ष 2014 में कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए के पद पर नियुक्ति हुये थे, तत्पश्चात् वर्ष 2024 में कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-बी के पद पर पदोन्नति हुये एवं सभी याचीगणों की सेवायें 10 वर्ष से ज्यादा की हो चुकी है, अतः पुलिस मुख्यालय के सरकुलर एवं शासनादेशों के परिप्रेक्ष्य में प्रथम प्रोन्नति वेतनमान कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-बी के पद का ग्रेड पे 4200 रूपये पाने के हकदार है.

याचिका में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश कम्प्यूटर स्टॉफ (नॉन गस्टेड) सेवानियमावली-2011 के नियम 5 (2) में यह व्यवस्था प्रतिपादित है कि कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए के पद पर 6 वर्षों के सेवायें पूर्ण करने के पश्चात् कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-बी के पद पर पदोन्नति प्रदान की जायेगी.

याचीगणों की 6 वर्ष की सेवायें वर्ष 2020 में कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए के पद पर पूर्ण हो चुकी थी, अतः उक्त नियमावली-2011 के तहत याचीगणों को वर्ष 2020 से ही अगला वेतनमान दिया जाना चाहिये था.

याचिका में लाल बाबू शुक्ला केस का दिया हवाला

याचिका में यह भी कहा गया था कि लाल बाबू शुक्ला के केस में हाईकोर्ट ने यह व्यवस्था प्रतिपादित की है कि पुलिस कर्मियों की प्रशिक्षण अवधि को सेवा में जोड़कर प्रोन्नति वेतनमान दिया जाय.

सभी याचीगण उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों के थानों में कार्यरत है. एवं इनके द्वारा एफ०आई०आर० लेखन, केस डायरी व अन्य अधिकारिक कार्य किये जाते है.



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