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कांग्रेस में ‘सलाह’ की सजा! मो. मोकिम को क्यों दिखाया बाहर का रास्ता? जानें सोनिया गांधी को खड़गे के बारे में लिखा पत्र

Odisha Congress Internal Politics: कांग्रेस भले ही देशभर में मुस्किल दौर का सामना कर रही है लेकिन उन्हें सलाह देने वाले अब भी पसंद नहीं आ रहे हैं. सोनिया गांधी को पत्र लिखकर सलाह देने वाले ओडिशा के कटक पूर्व विधायक को मोहम्मद मोकिम को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है. आइये जानें पूरा मामला?

Odisha Congress Internal Politics Disciplinary Action On Mohammed Moquim For Writing Latter To Sonia Gandhi Mallikarjun Kharge

ओडिशा कांग्रेस संकट

Odisha Congress Internal Politics: कांग्रेस भले ही इन दिनों देशभर में सियासी तौर पर मुश्किल दौर से गुजर रही हो, लेकिन पार्टी नेतृत्व को “सलाह” देने वाले नेता अब भी रास नहीं आ रहे हैं. ओडिशा की राजनीति से सामने आए ताज़ा घटनाक्रम में कांग्रेस ने कटक से पूर्व विधायक मोहम्मद मोकिम को पार्टी से निष्कासित कर दिया है. वजह बना सोनिया गांधी को लिखा गया वह पत्र, जिसमें मोकिम ने न सिर्फ पार्टी के कामकाज पर सवाल उठाए बल्कि अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की उम्र और नेतृत्व क्षमता पर भी टिप्पणी कर दी.

ओडिशा के बारबाटी-कटक से पूर्व विधायक रहे मोहम्मद मोकिम को पार्टी-विरोधी गतिविधियों (Odisha Congress Politics)का दोषी मानते हुए कांग्रेस ने उनकी प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी. यह कार्रवाई ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष भक्त चरण दास के प्रस्ताव पर की गई, जिसे ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) ने मंजूरी दी. पार्टी नेतृत्व का तर्क है कि संगठनात्मक अनुशासन से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता.

सोनिया गांधी को लिखा था पत्र (Mohammed Moquim Latter To Sonia Gandhi)

मोकिम ने हाल ही में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को एक लंबा पत्र लिखा था. इस पत्र में उन्होंने कहा था कि कांग्रेस कठिन दौर से गुजर रही है और उसे नए विज़न व नए नेतृत्व की ज़रूरत है. मोकिम ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की उम्र को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि 83 वर्षीय अध्यक्ष युवा पीढ़ी के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं, इसलिए पार्टी को किसी युवा चेहरे को आगे लाने पर विचार करना चाहिए.

हाईकमान की थी था सलाह (Mohammed Moquim Suggestion To Congress)

अपने पत्र में मोकिम ने कर्नाटक के डीके शिवकुमार, राजस्थान के सचिन पायलट और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी का भी उल्लेख किया. उन्होंने लिखा कि इन नेताओं ने अपने-अपने राज्यों में स्थापित नेतृत्व को चुनौती दी है और पार्टी के भीतर नई ऊर्जा ला सकते हैं. मोकिम का मानना था कि कांग्रेस को भविष्य की राजनीति के लिए ऐसे ही चेहरों पर दांव लगाना चाहिए.

इतना ही नहीं, मोकिम ने ज्योतिरादित्य सिंधिया और हिमंता बिस्वा सरमा के कांग्रेस छोड़ने का जिक्र करते हुए नेतृत्व के साथ तालमेल की कमी को इसका बड़ा कारण बताया. उन्होंने नुआपड़ा विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत का उदाहरण देते हुए पार्टी की चुनावी रणनीति और नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े किए.

कांग्रेस को सलाह नामंजूर (Congress Action On Mohammed Moquim)

कांग्रेस नेतृत्व ने इन सभी बयानों को अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा. पार्टी का साफ कहना है कि अंदरूनी असहमति को इस तरह सार्वजनिक या शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर उठाना संगठनात्मक एकता के खिलाफ है.

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कुल मिलाकर, कांग्रेस का यह कदम एक बार फिर यह संदेश देता है कि पार्टी में सलाह और असहमति की एक तय सीमा है. मोहम्मद मोकिम का निष्कासन सिर्फ एक नेता के बाहर होने की कहानी नहीं, बल्कि उस अंदरूनी बेचैनी का संकेत भी है जिससे कांग्रेस लंबे समय से जूझ रही है. जहां सवाल उठाने और अनुशासन निभाने के बीच की लकीर बेहद पतली होती जा रही है.



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