सुप्रीम कोर्ट 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में सजा के निलंबन करने और जमानत की मांग वाली सज्जन कुमार और बलवंत खोखर की ओर से दायर याचिका पर दीपावली के बाद सुनवाई करेगा. कोर्ट ने दोषियों के वकील से कहा है कि वह एक चार्ट दाखिल करें कि इस मामले में निचली अदालत और हाई कोर्ट की किया टिप्पणियां रही है. जस्टिस जे के महेश्वरी और जस्टिस विजय विश्नोई की पीठ ने यह आदेश दिया. पिछली सुनवाई में वकील राकेश दहिया के माध्यम से दायर याचिका में बलवंत खोखर ने सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया गया था कि आवेदक फरलो के आवेदन पर शीघ्रता से विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद जेल अधिकारियों ने 26 सितंबर 2024 को ही आवेदन खारिज कर दिया था.
गंभीर स्वास्थ्य का हवाला देते हुए राहत की मांग
बलवंत खोखर ने 17 दिसंबर 2018 के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है. खोखर के साथ सज्जन कुमार को इस मामले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था और वह आजीवन कारावास की सजा काट रहा है और तिहाड़ जेल में बंद है. दिल्ली कैंट मामले में कोर्ट ने दोषी करार दिया था. खोखर ने अपने आवेदन में दावा किया कि वह 66 वर्ष के वरिष्ठ नागरिक है और शारीरिक रूप से विकलांग है, निचले अंग में 54 प्रतिशत स्थायी विकलांगता है और मधुमेह, सीए के साथ उच्च रक्तचाप और डिसलिपिडीमिया जैसी विभिन्न बीमारियों से पीड़ित है.
10 साल की सजा पाने वाले पूर्व विधायक महेंद्र यादव की मंडोली जेल में कोविड से मौत हो गई थी. सज्जन कुमार और बलवंत खोखर 17 दिसंबर 2018 को दोषी ठहराए जाने के बाद से तिहाड़ जेल में बंद है. खोखर की उम्रकैद की सजा को दिल्ली हाई कोर्ट ने 2018 में बरकरार रखा था, जबकि 2013 में ट्रायल कोर्ट द्वारा सज्जन कुमार को बरी करने के फैसले को पलट दिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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