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अमित शाह पर टिप्पणी का मामला: राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें, सुल्तानपुर कोर्ट ने 19 जनवरी को खुद पेश होने को कहा

सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को 19 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है. कोर्ट ने धारा 313 के तहत राहुल को अपना पक्ष रखने को कहा है.

Amit Shah defamation case

Defamation Case: आशुतोष मिश्र/सुल्तानपुर: कांग्रेस के दिग्गज नेता और सांसद राहुल गांधी एक बार फिर कानूनी पेच में फंसते नजर आ रहे हैं. गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ साल 2018 में की गई एक कथित टिप्पणी को लेकर चल रहे मानहानि के मामले में सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए (MP-MLA) कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. मंगलवार को करीब 40 मिनट तक चली अदालती कार्यवाही के बाद जज शुभम वर्मा ने राहुल गांधी को धारा 313 के तहत तलब किया है. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब राहुल गांधी को 19 जनवरी को खुद अदालत के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा.

अदालत के भीतर क्या हुआ?

मंगलवार की सुनवाई काफी अहम रही. राहुल गांधी के वकील काशी शुक्ला ने गवाह रामचंद्र दुबे से अपनी जिरह (Cross-examination) पूरी की. इसके बाद, शिकायतकर्ता और भाजपा नेता विजय मिश्रा के वकील संतोष पांडेय ने कोर्ट को बताया कि अब उनकी तरफ से कोई और गवाह पेश नहीं किया जाएगा. गवाही का दौर पूरा होते ही कोर्ट ने अगला कदम उठाया और राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दे दिया.

धारा 313 का मतलब क्या है?

कानूनी जानकारों की मानें तो जब किसी मामले में गवाहों के बयान और सबूत दर्ज हो जाते हैं, तब कोर्ट धारा 313 के तहत आरोपी को अपनी सफाई देने का मौका देती है. जज शुभम वर्मा ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी को अब अपने खिलाफ आए साक्ष्यों पर खुद अपनी बात कहनी होगी. यह प्रक्रिया केस के फैसले की ओर बढ़ने का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जाती है.

6 साल पुराना विवाद

यह मामला आज का नहीं, बल्कि 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के समय का है. 8 मई 2018 को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने अमित शाह को लेकर एक बयान दिया था, जिसे भाजपा ने बेहद आपत्तिजनक माना था. इस बयान में राहुल गांधी ने जज बी.एच. लोया की मृत्यु का जिक्र किया था. बता दें कि जज लोया उस समय सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस की सुनवाई कर रहे थे. हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने जज लोया की मौत को सामान्य बताया था. इसी बयान से आहत होकर सुल्तानपुर के भाजपा नेता विजय मिश्रा ने अगस्त 2018 में मानहानि का केस ठोक दिया था.

पहले भी जा चुकी है सांसदी

राहुल गांधी के लिए मानहानि के मामले नए नहीं हैं. इससे पहले मार्च 2023 में ‘मोदी सरनेम’ वाले मामले में सूरत कोर्ट ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई थी, जिसके चलते उनकी लोकसभा सदस्यता भी चली गई थी. हालांकि, बाद में ऊपरी अदालत से राहत मिलने के बाद उनकी सदस्यता बहाल हो गई. सुल्तानपुर वाले इस मामले में राहुल गांधी पहले ही जमानत पर हैं, लेकिन अब 19 जनवरी की पेशी पर सबकी नजरें टिकी हैं कि कोर्ट में वे अपनी सफाई में क्या कहते हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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