बिहार एसआईआर मामले में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया कि वह मसौदा मतदाता सूची में शामिल न किए गए व्यक्तियों की अलग सूची प्रकाशित करने के लिए नियमों के तहत बाध्य नही है.
आयोग ने अपने हलफनामा में यह भी कहा है कि नियमों के तहत उसे मसौदा मतदाता सूची में शामिल न किए गए व्यक्तियों के कारण बताने की भी आवश्यकता नहीं है. आयोग ने कहा कि उसने मसौदा मतदाता सूची राजनीतिक दलों के साथ साझा की है.
आयोग ने यह भी कहा कि जिन व्यक्तियों को मसौदा मतदाता सूची में शामिल नही किया गया है, उनके पास शामिल किए जाने के लिए घोषणा पत्र प्रस्तुत करने का विकल्प है. चुनाव आयोग ने एडीआर की ओर से दायर उस अर्जी का विरोध किया है, जिसमें मसौदा मतदाता सूची में शामिल न किए गए व्यक्तियों की सूची प्रकाशित करने उन्हें शामिल न किए जाने के कारण बताने की मांग की गई है.
कोर्ट 12 अगस्त और 13 अगस्त को इस मामले में सुनवाई करने वाला है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि राजनीतिक दलों को इस समय गैर सरकारी संगठनों की तरह काम करना चाहिए. वही एडीआर की ओर से पेश प्रशांत भूषण ने कहा था कि चुनाव आयोग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि ये 65 लाख या तो मर चुके हैं या स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गए हैं.
चुनाव आयोग और नागरिकता विवाद
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि मेरा सवाल ये है कि नागरिकता तय करने का अधिकार चुनाव आयोग को किसने दिया? इस पर कोर्ट ने कहा था कि क्या चुनाव आयोग का ये कर्तव्य नहीं है कि यह सुनिश्चित करे कि कोई अयोग्य व्यक्ति वोट न डाले? इसके बाद नागरिकता की जरूरत नही है.
वही वरिष्ठ अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि 2003 में जब ऐसा व्यापक पुनरीक्षण हुआ था तब चुनाव में काफी समय बचा , लेकिन इस बार चुनाव नजदीक है, जिसके लाखों लोगों को सूची से हटाने की आशंका है.
जबकि वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा था कि चुनाव आयोग राशन कार्ड तक को मान्यता नहीं दे रहा है, जबकि ये गरीबों के पास सबसे सामान्य पहचान है.
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-भारत एक्सप्रेस
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