न्यायिक जवाबदेही और सुधार अभियान (सीजेएआर) ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है. सीजेएआर ने यह आलोचना हाई कोर्ट के न्यायाधीश पद के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा सिफारिश किए गए वकील श्वेताश्री मजूमदार और राजेश दातार की नियुक्ति को रोके जाने पर की है.
सुप्रीम कोर्ट को इसपर केंद्र सरकार से जवाब मांगना चाहिए-सीजेएआर
सीजेएआर ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को इसपर संज्ञान लेना चाहिए और केंद्र सरकार से जवाब मांगना चाहिए. पूछना चाहिए कि इनकी नियुक्ति में देरी का कारण पूछा जाना चाहिए. हाल ही में इन दोनों वकीलों ने न्यायाधीश बनने की दी गई सहमति को वापस ले लिया है. वकीलों का मानना है कि उनके नाम बाकी सिफारिशों से अलग करके बिना किसी कारण के लंबित रख दिए गए, जबकि अन्य नामों की मंजूरी मिल गई.
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केंद्र सरकार द्वारा कानून और संविधान का जानबूझकर की जा रही अनदेखी
सीजेएआर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कानून और संविधान का जानबूझकर अनदेखी की जा रही है. सुप्रीम कोर्ट को इसको लेकर कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अगर केंद्र सरकार ऐसे योग्य उम्मीदवारों को बिना कारण खारिज करती है तो सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की पारदर्शिता निष्फल हो जाएगी. इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता की खतरे में पड़ जाएगी.
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सीजेएआर ने कहा कि इस तरह की घटना दोबारा ना घटे
सीजेएआर ने कहा कि इस तरह की घटना दोबारा ना घटे, इसके लिए कोई कार्रवाई भी नही की गई. सीजेएआर ने इसे गंभीर और अनुचित बताया है. उन्होंने कहा कि जब हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों कॉलेजियम ने उनके नामों को मंजूरी दी थी. तब उनकी नियुक्ति में देरी का कोई कारण नही बनता.
-भारत एक्सप्रेस
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