बीआर गवई
Constitution’s Supremacy In India: भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस बीआर गवई ने महाराष्ट्र के अमरावती में आयोजित एक सम्मान समारोह में कहा कि भारत का संविधान देश में सर्वोपरि है. उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र के तीनों अंग—न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका—संविधान के अधीन कार्य करते हैं.
सीजेआई बीआर गवई ने कहा कि कुछ लोग संसद को सर्वोच्च मानते हैं, लेकिन उनकी राय में संविधान सबसे ऊपर है. उन्होंने 1973 के केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मूल संरचना सिद्धांत स्थापित किया था, जिसके तहत संसद को संविधान में संशोधन का अधिकार है, लेकिन वह इसके मूल ढांचे को नहीं बदल सकती.
न्यायाधीशों का कर्तव्य- नागरिकों के अधिकारों की रक्षा
सीजेआई बीआर गवई ने जोर देकर कहा कि न्यायाधीशों का कर्तव्य केवल शक्ति का उपयोग करना नहीं, बल्कि नागरिकों के अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना है. उन्होंने कहा कि एक जज को अपने फैसलों में स्वतंत्र रूप से सोचना चाहिए, बिना इस चिंता के कि लोग क्या कहेंगे.
जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि उनके फैसले हमेशा संविधान में निहित मौलिक अधिकारों के समर्थन में रहे हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार के खिलाफ आदेश देना किसी जज को स्वतंत्र नहीं बनाता, बल्कि यह संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन है.
बुलडोजर जस्टिस के खिलाफ दिए फैसले का जिक्र
सीजेआई बीआर गवई ने बुलडोजर जस्टिस के खिलाफ अपने फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि आश्रय का अधिकार सर्वोच्च है. उन्होंने कहा कि संवैधानिक मूल्यों और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना न्यायपालिका का प्राथमिक दायित्व है.
जस्टिस बीआर गवई ने जोर दिया कि न्यायाधीशों को अपने फैसलों को बिना किसी बाहरी दबाव के लेना चाहिए. उनके अनुसार, न्यायपालिका का उद्देश्य संविधान के सिद्धांतों को बनाए रखना है, न कि लोकप्रिय राय का अनुसरण करना.
सीजेआई ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर दिया बल
अमरावती में बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित समारोह में सीजेआई ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि जजों को संवैधानिक सिद्धांतों के प्रति निष्ठा रखनी चाहिए. जस्टिस गवई का यह बयान संविधान की सर्वोच्चता और न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित करता है.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

