मानवाधिकारों और टिकाऊ विकास का अभिन्न संबंध: नौवें चीफ जस्टिस एम.सी. छागला मेमोरियल लेक्चर में क्या बोले पूर्व CJI?
मुंबई विश्वविद्यालय में 9वें एम.सी. छागला मेमोरियल लेक्चर में मानवाधिकार और सतत विकास लक्ष्यों के गहरे संबंध पर चर्चा हुई.
एनसीएमईआई के कार्यकारी चेयरमैन ने तमिलनाडु में अल्पसंख्यक शिक्षा के लिए खींची नई रेखा, पारदर्शिता और विश्वास को बनाया केन्द्र-बिन्दु
चेन्नई की उच्च-स्तरीय बैठक में प्रशासनिक अड़चनों, संवैधानिक अधिकारों और राष्ट्र-निर्माण में अल्पसंख्यक संस्थानों की भूमिका पर गहन मंथन, प्रो.(डॉ) शाहिद अख़्तर ने उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी सिर्फ एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि संविधान की परीक्षा है
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय पर अंतिम निर्णय भविष्य में जो भी हो, लेकिन 2024 का फैसला भारतीय संवैधानिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में याद किया जाएगा। इसने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी संस्थान की पहचान केवल कानून की भाषा से तय नहीं होगी, बल्कि उसके इतिहास, समाज के योगदान और संविधान की मूल भावना को भी समान महत्व मिलेगा।
Independence day और Republic day पर झंडा फहराने का तरीका अलग क्यों है? जानें वजह
15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 ये दोनों दिन भारत के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों राष्ट्रीय पर्वों पर तिरंगा फहराने के नियम अलग-अलग होते हैं? इस वीडियो में जानिए ध्वजारोहण और Flag Unfurling का अंतर, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की भूमिका के पीछे का कारण, और लाल किले पर फहराए जाने वाले तिरंगे की रस्सी से जुड़ी एक अनोखी परंपरा. यह कहानी सिर्फ झंडे की नहीं, बल्कि भारत की आज़ादी और संविधान की आत्मा की है.
‘संस्कृत के योगदान पर गर्व’- संविधान के संथाली भाषा में प्रकाशित होने पर बोले पीएम मोदी
भारत का संविधान शुक्रवार को संथाली भाषा में जारी किया गया, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहनीय कदम बताया. उन्होंने कहा कि इससे आदिवासी समुदायों में संवैधानिक जागरूकता और लोकतांत्रिक भागीदारी मजबूत होगी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे संथाली भाषी समुदाय के लिए ऐतिहासिक पल बताया.
‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का आधार…’, जस्टिस बी.आर. गवई ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दिया संबोधन
जस्टिस केटी देसाई मेमोरियल लेक्चर के दौरान जस्टिस बी.आर. गवई ने कहा- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की आधार है. संविधान ने इसे मजबूत सुरक्षा दी, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था के लिए सीमाएं भी तय कीं.
“संविधान जीवंत दस्तावेज, 76 वर्षों में देश ने तय की लंबी यात्रा”…संविधान दिवस पर बोले पूर्व CJI बी.आर. गवई
पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने संविधान दिवस पर कहा कि भारत का संविधान एक जीवंत और प्रगतिशील दस्तावेज है, जिसने 76 वर्षों में लोकतंत्र, समानता और न्याय को मजबूत किया है. उन्होंने संसद और न्यायपालिका की ऐतिहासिक भूमिका पर भी प्रकाश डाला.
India Constitution की धारा 143 को लेकर Supreme Court का बड़ा फैसला,जानें क्या आया?
संविधान की धारा 143 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया. ये फैसला देश भर के गर्वनरों के अधिकारों को लेकर था. जिसको लेकर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि हम इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकते. इन सभी मामलों को लेकर हमारे संवाददाता कृष्ण मोहन शर्मा ने पूर्व उपराज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी से खास बातचीच की, देखें ये खास रिपोर्ट।
NALSA की नेशनल कॉन्फ्रेंस में CJI बी.आर. गवई का संबोधन, गांधीजी की प्रेरणा से गरीबों तक न्याय पहुंचाने पर दिया जोर
CJI जस्टिस बीआर गवई ने आज राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) की कॉन्फ्रेंस में संबोधन दिया. उन्होंने कानूनी सहायता को गांधी जी की कुंजी बताते हुए गरीबों तक न्याय पहुंचाने पर जोर दिया. मणिपुर की बुजुर्ग महिला से जुड़ी भावुक यादें भी साझा कीं.
SIFOCC में CJI बी.आर. गवई का संबोधन, मुख्य न्यायाधीश ने देश में व्यावसायिक कानून की यात्रा पर डाला प्रकाश
CJI B.R. Gavai Speech: SIFOCC के 6ठे पूर्ण सत्र में संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर देश के मुख्य न्यायाधीश गवई ने संबोधन दिया. उन्होंने कहा कि व्यावसायिक कानून, सेबी, मध्यस्थता, आईबीसी जैसे कानूनों ने देश में पारदर्शिता बढ़ाई.





