Bharat Express DD Free Dish
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital

CJI गवई का भावुक संबोधन, कहा-‘वकील बनने का फैसला मेरा नहीं, पिता का था – आज गर्व है उस राह पर चलने का’

सीजेआई बी. आर. गवई ने दिल्ली में बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित समारोह में भावुक होते हुए कहा कि यह समारोह उनके लिए पारिवारिक जैसा है. उन्होंने अपने पिता को याद किया और सुप्रीम कोर्ट में अपने न्यायिक योगदान का उल्लेख किया.

CJI BR Gavai

बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा दिल्ली के ललित होटल में आयोजित स्वागत समारोह में सीजेआई बी. आर गवई ने मैंने लिखित स्पीच तैयार की थी, लेकिन अब वो नहीं पढ़ रहा हूं. यह फंक्शन फैमिली फंक्शन की तरह है और मैं बहुत सभी बार सदस्यों का शुक्रगुजार हूं. उन्होंने कहा कि हमारा संविधान बहुत व्यापक और एकता में अनेकता को बसाए हुए है. यहां जिसे आप देख सकते हैं‌.

उन्होंने कहा कि वो अपनी रुचि से वकील नहीं बने. बल्कि मेरे पिता चाहते थे और मैं तब वकील बना और उनके आशीष से मैं आज यहां हूं. उन्होंने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि “मेरे पिता ने मुझसे कहा था कि वकील रहोगे तो भले ही पैसे कमा लोगे, लेकिन अगर आप संवैधानिक न्यायालय के न्यायाधीश बन जाते हैं, तो आप अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए डॉ. अंबेडकर के सामाजिक और आर्थिक न्याय के विचार को आगे बढ़ा सकते हैं. उन्होंने मुझे खुशी है कि मैंने अपने पिता के फैसले का पालन करने का फैसला किया.

न्यायिक सेवा का 28 वर्षों का अनुभव

हाईकोर्ट जज के तौर पर 22 साल और सुप्रीम कोर्ट जज के तौर पर पिछले 6 साल की आखिरी यात्रा – मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है, कोई नहीं कह सकता कि वे परिपूर्ण हैं, लेकिन मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया.

उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में आप बहुत कुछ नया सीखते हैं, जो हाईकोर्ट में नहीं होता. जस्टिस नारिमन ने मुझे आईबीसी फैसला लिखने के लिए प्रेरित किया था. जस्टिस रोहिंगटन नरिमन और जस्टिस नागेश्वर राव का मैं हमेशा आभारी रहूंगा.

उन्होंने कहा कि जब भी अवसर आया, सामाजिक-आर्थिक और सामाजिक-राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास किया.जब भी मौलिक अधिकारों और निर्देशक सिद्धांतों का सवाल आया, केशवानंद भारती में फैसला हमेशा हमारे पक्ष में रहा.

सुप्रीम कोर्ट: एक नई सीख का मंच

केशवानंद भारती में यह संकल्प लिया गया कि मौलिक अधिकार भारत के संविधान की आत्मा हैं. जबकि इस समारोह में मौजूद जस्टिस के. वी विश्वनाथन ने कहा कि जैसा कि एसजी ने कहा कि सीजेआई का जीवन प्रेरणा देने वाला है जो नागपुर से यहां तक का सफर है. सीजेआई की न्यायिक गुणवत्ता अद्भुत है. वो विषय और केस के बारे में पूरा ब्यौरा रखते हैं और बहुत ही तेज लिखने वाले हैं.

यही वजह है कि उनके फैसलों में देरी नहीं होती. वही बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्रा ने कहा कि हमें उम्मीद है कि सीजेआई गवई सुप्रीम कोर्ट में लंबित 81 हजार मुकदमों को कम करने की कोशिश करेंगे.

साथ ही विभिन्न हाई कोर्ट में खाली पड़े जजों की पदों को भरेंगे. मनन मिश्रा ने कहा पिछले 6 वर्षो में आपको किसी ने नाराज होते हुए नही देखा है. आपका व्यक्तित्व अनमोल है. आपने किसी को नाराज होते हुए नही देखा हैं. इस स्वागत समारोह में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जस्टिस गवई की जिंदगी दास्तान किसी फिल्म स्टोरी से कम नहीं, जो एक झुग्गी से सीजेआई पद तक पहुंचने का सफर है. जस्टिस गवई जमीन से जुड़े हुए हैं और कानून के क्षेत्र में उनका योगदान अहम है.

जस्टिस त्रिवेदी को फेयरवेल न दिए जाने का उल्लेख

जस्टिस त्रिवेदी को फेयरवेल नहीं दिए जाने को लेकर एसजी ने कहा कि मुझे मुद्दे की जानकारी नहीं, जिस पर सीजेआई ने भी संकेत दिया था‌. 14 मई 1960 को जन्में जस्टिस संजीव खन्ना के पिता देव राज खन्ना दिल्ली हाई कोर्ट के जज रह चुके है. उनकी माँ सरोज खन्ना लेडी श्री राम कॉलेज में लेक्चर थी. वह सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एचआर खन्ना के भतीजे है, जिन्होंने केशवानंद भारती (1973) में मूल संरचना सिद्धांत का प्रतिपादन किया था.

आपातकाल के दौरान एडीएम जबलपुर बंदी प्रत्यक्षीकरण मामले (1976) में एकमात्र असहमति व्यक्त की थी. बदले में जस्टिस एचआर खन्ना को जनवरी 1977 में भारी कीमत चुकानी पड़ी थी. उन्हें सीजेआई नहीं बनने दिया गया था.

ये भी पढ़ें: तुर्कीये की एविएशन कंपनी सेलेबी ने सरकार के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का खटखटाया दरवाजा

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital