भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई ने सुप्रीम कोर्ट में दो दिग्गज कानूनी हस्तियों स्वर्गीय लाल नारायण सिन्हा और स्वर्गीय शांति भूषण की तस्वीरों का अनावरण किया. यह आयोजन सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) द्वारा शांति भूषण की 100वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया. कार्यक्रम में पूर्व मुख्य न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता, बार के सदस्य और उनके परिवारजन उपस्थित रहे.
महान व्यक्तित्वों की तस्वीरों का अनावरण
CJI बी.आर. गवई ने अपने संबोधन में कहा कि यह उनके लिए गर्व की बात है कि वे इन दो महान कानूनी व्यक्तित्वों की तस्वीरों का अनावरण कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि वकालत के शुरुआती दिनों में वे इनके नाम और कामों से बहुत प्रभावित थे. दोनों ने कानून के क्षेत्र में जो मानक स्थापित किए, वे आज भी नए वकीलों को प्रेरित करते हैं.
लाल नारायण सिन्हा: संविधान के रक्षक
CJI बी.आर. गवई ने लाल नारायण सिन्हा को संविधान और प्रशासनिक कानून का मास्टर बताया.
- वे भारत के सॉलिसिटर जनरल और बाद में अटॉर्नी जनरल रहे.
- गोलक नाथ और केशवानंद भारती जैसे ऐतिहासिक मामलों में उनकी दलीलें संविधान की आत्मा को मजबूत करने वाली थीं.
- बेसिक स्ट्रक्चर सिद्धांत को मजबूत करने में उनकी दूरदर्शिता अहम रही.
- हुसैनारा खातून केस में उन्होंने तेज सुनवाई को मौलिक अधिकार बताया.
- तुलसीराम पटेल केस में चार जजों को अपनी दलील से सहमत कर लिया, जबकि पहले पूरा बेंच सरकार के खिलाफ था.
CJI बी.आर. गवई ने कहा कि लाल नारायण सिन्हा ने कानून को कमजोर लोगों की आवाज बनाने का काम किया. बाद में बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कानूनी संस्थाओं को मजबूत किया.
शांति भूषण: लोकतंत्र के योद्धा
शांति भूषण को CJI बी.आर. गवई ने साहसी और दूरदर्शी वकील बताया.
- 1977-79 में कानून मंत्री रहते हुए उन्होंने आपातकाल के बाद लोकतंत्र को बहाल करने में बड़ी भूमिका निभाई.
- पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) को संस्थागत रूप देने के लिए सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन की स्थापना की.
- इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण केस में उन्होंने साबित किया कि संसद संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर को नष्ट नहीं कर सकती.
- कोविड के दौरान ऑनलाइन सुनवाई में भी उनकी दलीलें प्रभावशाली रहीं.
- CJI बी.आर. गवई ने बताया कि मुंबई में जूनियर वकील रहते हुए उन्होंने शांति भूषण की प्रारंभिक दलीलें सुनी थीं और हमेशा प्रभावित रहे.
सुप्रीम कोर्ट में लगी तस्वीरों का महत्व
CJI बी.आर. गवई ने कहा कि ये तस्वीर सुप्रीम कोर्ट की दीवारों पर संविधान की आत्मा की तरह चमकेंगी. ये युवा वकीलों, जजों और नागरिकों को याद दिलाएंगी कि कानून का असली मतलब न्याय, नैतिकता और सच्चाई की रक्षा करना है. ये तस्वीर हमें संकट के समय भी अडिग रहने की प्रेरणा देंगी.
CJI बी.आर. गवई ने एससीबीए अध्यक्ष विकास सिंह का धन्यवाद किया कि उन्होंने शांति भूषण की जयंती पर यह आयोजन किया. उन्होंने बताया कि एक महीने पहले जयंत भूषण ने उन्हें 19 नवंबर को रोहिंग्टन नारिमन के व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन व्यस्तता के कारण वे नहीं जा सके. हालांकि, तस्वीरों के अनावरण के लिए उन्होंने तुरंत हामी भर दी.
उन्होंने जयंत भूषण और जस्टिस पार्थ सारथी का भी आभार जताया, जिन्होंने ये चित्र दान किए. CJI बी.आर. गवई ने कहा कि यह उनके कार्यकाल का आखिरी बड़ा आयोजन है और वे खुश हैं कि इन दो दिग्गजों को सम्मान देने का मौका मिला.
CJI बी.आर. गवई ने सभी से अपील की कि हम इन महान व्यक्तित्वों की विरासत को आगे बढ़ाएं. उनकी साहस, ईमानदारी और समर्पण की मिसाल को अपनाएं. ये चित्र आने वाली पीढ़ियों को सिखाएंगे कि कानून सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि देशसेवा का माध्यम है.
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