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संविधान दिवस समारोह में शामिल सीजेआई सूर्यकांत ने न्यायपालिका और कार्यपालिका के संतुलन पर जोर दिया।

CJI कांत ने कहा कि न्याय प्रणाली में मौजूद “अदृश्य पीड़ितों” की पीड़ा को दूर करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बार के सदस्यों पर है. वकीलों की सोच, गंभीरता और अपने पेशे के प्रति समर्पण सीधे तौर पर देश के संवैधानिक भविष्य को प्रभावित करता है.

Edited by Vaibhav Gupta

मुख्य न्यायाधीश (CJI) कांत ने कहा कि न्याय प्रणाली में मौजूद “अदृश्य पीड़ितों” की पीड़ा को दूर करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बार के सदस्यों पर है. उन्होंने कहा कि वकीलों की सोच, गंभीरता और अपने पेशे के प्रति समर्पण सीधे तौर पर देश के संवैधानिक भविष्य को प्रभावित करता है.

वकीलों के पास Constitution की गहरी समझ

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि संवैधानिक मामलों में अदालत की सहायता करने के साथ-साथ बार को संविधान की आत्मा (Soul of Constitution) और शब्द को उजागर करने के लिए सामुहिक कदम उठाने होंगे. इसके तहत समाज के कमजोर और हाशिये पर रह रहे लोगों को कानूनी सहायता देना, तथा राज्य के नीति निदेशक सिंद्धान्तों में निहित दृष्टिकोण के अनुरूप काम करना शामिल हैं. सीजेआई ने आगे कहा कि वकीलों के पास संविधान की गहरी समझ होती है और इसी कारण वे व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों रूप से आदेश नागरिक बनने की अनूठी क्षमता रखते है. उन्होंने युवा वकीलों से इस दायित्व को निभाने की अपील की.

उन्होंने कहा कि युवा वकील क्षमताओं से परिपूर्ण हैं, संभावनाओं से भरे हैं और इस पेशे से जुड़ी जिम्मेदारियों को भली-भांति समझते हैं, इसलिए उन्हें आगे आकर इसका नेतृत्व करना चाहिए. इस दौरान केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थे. इनके अलावे सुप्रीम कोर्ट के कई न्यायाधीश, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, भूटान, केन्या, मॉरीशस, नेपाल, श्रीलंका और मलेशिया के प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद थे.

विविधता में एकता का सबसे सफल मॉडल

इस समारोह के दौरान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने विदेशी प्रतिनिधियों, जिनमें कई देश के मुख्य न्यायाधीश और न्यायधीश शामिल थे, उनको स्मृति चिन्ह भेंट किए. इस समारोह में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि भारत का संविधान, विविधता में एकता का सबसे सफल मॉडल है.

एसजी मेहता ने कहा कि भारत का संविधान लगातार 165 दिनों की गहन बहस के बाद तैयार किया गया है और यह उस समय के देश के सबसे प्रतिभाशाली दिमागों की देन है. उन्होंने यह भी कहा कि संविधान सभा के सदस्य अलग-अलग क्षेत्रों, भाषाओं, धर्मो और संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करते थे. उन्होंने कहा कि संविधान के तीनों अंग न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका एक दूसरे से स्वतंत्र हैं, लेकिन आंतरिक चेक एंड बैलेंस के साथ काम कर रहे हैं.

व्यवस्था को पटरी पर लाने में योगदान

एसजी मेहता आगे ने कहा कि अगर कार्यपालिका या विधायिका कभी संविधान की सीमा से बाहर गई तो न्यायपालिका ने हस्तक्षेप कर व्यवस्था को पटरी पर लाने में बड़ा योगदान दिया. जबकि समारोह में मौजूद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि Law Day आत्मनिरीक्षण का दिन हैं. उन्होंने इसे आत्मविश्लेषण का अवसर बताया और कहा कि यह मूल्यांकन करने की जरूरत है कि क्या संविधान अपने उद्देश्य को पूरी तरह पूरा कर पा रहा हैं.

उन्होंने कहा कि कानून तभी हर नागरिक तक प्रभावी रूप से पहुच सकता है जब कानून निर्माण, न्याय वितरण और न्याय की पहुच तीनों तंत्र मजबूत हों. विकास सिंह ने कहा कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को विश्वास था कि भारत की सामाजिक व्यवस्था हमेशा योग्य नेताओं को चुनकर संसद भेजेगी, लेकिन आज चुनावों में काले धन और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के प्रवेश चिंता जनक है. उन्होंने ये भी कहा कि यह हमारे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है कि संसद में पहले और दूसरे आम चुनाव वाली गुणवत्ता जनप्रतिनिधियों में अब दिखाई नहीं देती है. इसपर देश को गंभीरता से विचार करना चाहिए.

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-भारत एक्सप्रेस



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