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फर्जी हस्ताक्षर मामले में कोर्ट का आदेश, दिल्ली पुलिस दर्ज करे प्राथमिकी

दिल्ली की अदालत ने जेनेसिस फाइनेंस कंपनी लिमिटेड और उसके प्रमोटरों के खिलाफ फर्जी हस्ताक्षर कर शेयर ट्रांसफर करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया. शिकायत में मृत व्यक्ति के नाम से दस्तावेजों की जालसाजी का आरोप लगाया गया है.

Delhi Police

दिल्ली पुलिस

फर्जी हस्ताक्षर करने के मामले में अदालत ने दिल्ली पुलिस को एक वित्त कंपनी एवं उसके प्रमोटर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है. आरोप है कि कंपनी के इक्विटी शेयरों को हस्तांतरित करने के लिए एक ऐसे व्यक्ति के फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे, जिनकी मौत हो चुकी है. न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि ने जेनेसिस फाइनेंस कंपनी लिमिटेड के एक शेयरधारक तृप्त सिंह की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है.

शिकायत में कंपनी, उसके प्रमोटर एवं प्रबंध निदेशक नरेश गर्ग, गोपाल बिष्ट (जीएफसीएल के सीएफओ/निदेशक) तथा कंपनी के प्रमोटर के परिवार के सदस्यों सहित कंपनी के अन्य अधिकारियों पर वित्तीय कदाचार का आरोप लगाया गया है. उसमें निदेशकों पर अवैध रूप से इक्विटी शेयरों को हस्तांतरित करने के लिए एक व्यक्ति बनवारी लाल साबू के हस्ताक्षर की जालसाजी करने का आरोप लगाया गया है. जबकि उसकी मौत पहले ही हो चुकी थी. उसे गंभीर आर्थिक अपराध बताया गया है. कोर्ट ने जाली प्रतिभूति हस्तांतरण फार्म की जांच का आदेश देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है.

कोर्ट ने कहा कि बनवारी लाल साबू का 7 अप्रैल 2016 को निधन हो गया था, इसलिए यह जांच करना महत्वपूर्ण है कि तीन मई 2016 को शेयर हस्तांतरण फार्म पर किसने हस्ताक्षर किए थे. कथित जाली दस्तावेज यानी शेयर हस्तांतरण फार्म को एफएसएल को भेजा जा सकता है. दिवंगत बनवारी लाल साबू के जाली हस्ताक्षरों पर विशेषज्ञ की राय के लिए और इसके लिए प्राथमिकी दर्ज करना अनिवार्य हो जाता है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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