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दिल्ली विकास प्राधिकरण ने अरावली रोड़ चौड़ीकरण के लिए पेड़ो की कटाई की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का किया रुख

दिल्ली में विकास और पर्यावरण के बीच एक बार फिर कानूनी खींचतान शुरू हो गई है. डीडीए ने अरावली रिज क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए वन भूमि डायवर्जन और पेड़ों की कटाई की अनुमति मांगी है.

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Edited by Radha Priya

Aravali Road Widening: दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अरावली रोड चौड़ीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. डीडीए ने कोर्ट से 473 पेड़ों की कटाई और 2519 पेड़ों के स्थानांतरण की अनुमति मांगी है. इस याचिका पर जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ 5 जनवरी को सुनवाई करेगी.

वन भूमि डायवर्जन का प्रस्ताव

डीडीए के प्रस्ताव के अनुसार, रिज के 0.79 हेक्टेयर क्षेत्र में सड़क निर्माण किया जाना है. इसके अतिरिक्त, CAPFIMS अस्पताल तक पहुंच के लिए 2.97 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन की अनुमति मांगी गई है. डीडीए ने स्पष्ट किया कि पहले यह वन डायवर्जन 3.6 हेक्टेयर का था, जिसे अब घटाकर 2.97 हेक्टेयर कर दिया गया है. पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के तहत, द्वारका के ढुलसिरस क्षेत्र में 3.68 हेक्टेयर गैर-वन भूमि की पहचान क्षतिपूरक वृक्षारोपण के लिए की गई है.

फर्जी अनुमति का विवाद

इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता ने डीडीए द्वारा 2015 और 2021 के बीच 60,000 से अधिक पेड़ों को काटने की अनुमति दिए जाने पर गंभीर सवाल उठाए थे. याचिकाकर्ता का आरोप है कि पेड़ों की कटाई की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और संरक्षण के लिए कोई पुख्ता तंत्र मौजूद नहीं है.

साथ ही, यह भी आरोप लगाया गया कि आवासीय परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कटाई हेतु फर्जी अनुमतियां जारी की गई हैं. इस मामले में वन अधिकारी ने हलफनामे में बताया कि उन्होंने 13 दिसंबर 2023 को वसंत कुंज पुलिस थाने को एफआईआर दर्ज करने के लिए पत्र लिखा था, जिसके जवाब में पुलिस ने कथित फर्जी अनुमति को ‘अपठनीय’ बताया.

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1100 पेड़ों की अवैध कटाई का मामला

वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट दिल्ली निवासी बिंदु कपूरिया द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहा है. इस याचिका में आरोप है कि कोर्ट की अनुमति के बिना रिज क्षेत्र में लगभग 1100 पेड़ काट दिए गए, जो मई 1996 के एमसी मेहता मामले में दिए गए आदेशों का खुला उल्लंघन है. छतरपुर से सार्क विश्वविद्यालय, मैदान गढ़ी और सतबरी इलाकों में 10 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण के दौरान इन पेड़ों को काटा गया है. याचिकाकर्ता की मांग है कि इस उल्लंघन के लिए जिम्मेदार दोषी अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की जाए.

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-भारत एक्सप्रेस



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