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सुप्रीम कोर्ट में मामला पेंडिंग तो हाईकोर्ट क्या करे? यूथ कांग्रेस की याचिका पर कोर्ट की तीखी टिप्पणी

Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने इंडियन यूथ कांग्रेस की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई से फिलहाल इनकार कर दिया है. कोर्ट 13 अक्टूबर को याचिका पर सुनवाई करेगा. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कोर्ट से निर्देश लेने के लिए समय मांग लिया है

Delhi High Court
Edited by Shubhra Rai

Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने इंडियन यूथ कांग्रेस की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई से फिलहाल इनकार कर दिया है. कोर्ट 13 अक्टूबर को याचिका पर सुनवाई करेगा. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कोर्ट से निर्देश लेने के लिए समय मांग लिया है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन सांब्रे ने याचिकाकर्ता से से कहा कि कृपया समझने की कोशिश कीजिए. सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले पर समान रूप से विचार कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से शपथ पत्र दाखिल करने को कहा है. जब सुप्रीम कोर्ट मामले में विचार कर रहा है, तो हम किस हद तक इसपर विचार कर सकते है.

वकील रूपेश सिंह भदौरिया के माध्यम से याचिका दायर

यह याचिका यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने वकील रूपेश सिंह भदौरिया के माध्यम से यह याचिका दायर की है. दाखिल याचिका में पुलिस के 1 अक्टूबर के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. यूथ कांग्रेस ने दिल्ली पुलिस से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी. इसके लिए 25 सितंबर को दिल्ली पुलिस के समक्ष आवेदन दिया गया था. दायर याचिका में प्रदर्शन में करीब 100 से 150 लोगों को शामिल होने की बात कही गई थी. साथ ही यूथ कांग्रेस ने सुरक्षा, यातायात, अनुशासन और कानून-व्यवस्था से जुड़े सभी वैध नियमों और शर्तों का पालन करने का भरोसा भी दिया था.

शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और एकत्र होने का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित

दायर याचिका में कहा गया है कि अनुमति के लिए आवेदन दिए जाने के बाद यूथ कांग्रेस की ओर से लगातार फॉलोअप किया गया, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शन की प्रस्तावित तारीख को ही अनुमति देने से इनकार कर दिया. याचिका में यह भी कहा गया है कि पुलिस को शांतिपूर्ण सभा को नियंत्रित और व्यवस्थित करने का अधिकार है, लेकिन परिस्थितियों का व्यक्तिगत और आनुपातिक आकलन किए बिना किसी प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती. याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 14, 19 (1)(a) और 19 (1)(b) का हवाला दिया है. याचिकाकर्ता का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और एकत्र होने का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित है.

हालांकि इन अधिकारों पर कानून के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, लेकिन ऐसे प्रतिबंध परिस्थितियों के अनुरूप और आनुपातिक होने चाहिए. दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों का हवाला दिया गया है, जिनमें शांतिपूर्ण सभा के अधिकारों को मान्यता देते हुए प्रशासन को प्रदर्शन को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बजाए उचित तरीके से नियंत्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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