Delhi High Court Maintenance Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने अपनी बेटी के भरण पोषण को लेकर अदालत द्वारा दिए गए आदेशों का अवहेलना करने के मामले में ब्रिटेन में रहने वाले एक व्यक्ति को अवमानना का दोषी ठहराया पाया है. कोर्ट ने इसे 6 महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही अदालत ने उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई को इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने का अनुरोध करने का निर्देश दिया है.
आदेशों का पालन करने के बजाय नजरअंदाज किया
जस्टिस सचिन दत्ता ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने फैमिली कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों का पालन करने के बजाय लगातार उन्हें नजरअंदाज किया और उसकी अवहेलना की. अदालत के अनुसार उसके आचरण से स्पष्ट है कि उसने न्यायिक व्यवस्था और अदालत की गरिमा के प्रति पूर्ण असम्मान दिखाया और जानबूझकर मेंटेनेंस की तय राशि का भुगतान नहीं किया.
हाई कोर्ट ने कहा कि,
अदालत के आदेशों का पालन करना प्रत्येक व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी है. यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर आदेशों की अवहेलना करता है, तो यह केवल दूसरे पक्ष के अधिकारों का हनन नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की प्रतिष्ठा और कानून के शासन को भी कमजोर करता है. मामले में अदालत ने पाया कि पिता के पास आदेशों का पालन करने का पर्याप्त अवसर थे, लेकिन उसने लगातार टालमटोल की और अपनी नाबालिग बेटी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी निभाने से बचता रहा.
केवल चेतावनी या जुर्माना पर्याप्त नहीं
अदालत ने माना कि यह जानबूझकर की गई अवमानना है, इसलिए केवल चेतावनी या जुर्माना पर्याप्त नहीं होगा. इन्ही स्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने आरोपी को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराते हुए छह महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करना कानून के शासन और न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक है.
पत्नी का आरोप था कि अदालत के आदेश के बावजूद उसके पति ने अपनी नाबालिग बेटी के भरण पोषण और कल्याण के लिए अंतरिम व्यवस्था के तहत हर महीने 1.40 हजार रुपए देने का निर्देश दिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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