दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश, नियम व दिशानिर्देशों का कथित रूप से उल्लंघन के मामले में हाई कोर्ट ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष आर्यन मान और अन्य उम्मीदवारों से नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने शुक्रवार को कुछ इस मामले में पक्षकार बनाते हुए आज कुछ उम्मीदवारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट 6 नवंबर को मामले में अगली सुनवाई करेगा.
प्रतिबंध के बावजूद आदेश का उल्लंघन
अदालत ने इस मामले में दो मीडिया को भी पक्षकार बनाया है और उन्हें नोटिस जारी कर 10 से 19 सितंबर के बीच रिकार्ड किए गए वीडियो फुटेज को सुरक्षित करने एवं उसे पेश करने को कहा है. उसने कहा कि विजय जुलूसों पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद उसके आदेश का उल्लंघन हुआ है. कम मतदान और जारी किए गए चालानों में वृद्धि दर्शाती है कि चुनाव व्यवस्थित तरीके से नहीं हुए. उसके संज्ञान में लाई गई सामग्री दर्शाता है कि कैसे उम्मीदवार आचरण के सभी स्थापित मानदंडों का उल्लंघन कर रहे थे.
वाहनों व ट्रैक्टरों के उपयोग की अनुमति नहीं
चुनाव प्रचार के दौरान संपत्तियों को विकृत करना, अवैध रूप से पर्चे बांटना, मोटर चालित वाहनों और ट्रैक्टरों का उपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि इससे यातायात बाधित होता है और आम लोगों का जीवन कष्टमय हो जाता है.
इससे पहले कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा दाखिल हलफनामे को कोर्ट ने रिकॉर्ड पर ले लिया है., जिसमें कहा गया है कि चुनाव के दौरान कार्रवाई की गई और सात उम्मीदवारों को शो-कॉज नोटिस जारी किए गए हैं. हालांकि इन आरोपों से उम्मीदवारों ने इनकार किया है. सीजे उपाध्याय ने कहा था कि छात्रों को दूसरा मौका दिया जाना चाहिए, लेकिन कोर्ट के पूर्व में दिए गए आदेश का उल्लंघन शर्मनाक है.
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-भारत एक्सप्रेस
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