दिल्ली हाई कोर्ट ने नाबालिग बच्चे के पासपोर्ट को लेकर बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि नाबालिग बच्चे का पासपोर्ट पिता या माता के बिना अनुमति के बनवाया जा सकता है. लेकिन उसे यह साबित करना पड़ेगा कि वह मां या पिता दोनों में से किसी एक का.संरक्षण प्राप्त होना चाहिए. जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने यह फैसला सुनाया है. कोर्ट ने यह साफ किया कि यह नियम मां या पिता, दोनों पर लागू होता है, बशर्ते बच्चा किसी एक अभिभावक की देखरेख में हो.
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बच्ची बालिग होने पर बच्चे के किसी भी अधिकार पर इसका कोई असर नही पड़ेगा. दायर याचिका में बच्ची के लिए पासपोर्ट जारी करने की मांग की गई थी, जिसमें पिता का नाम शामिल न हो. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अगर पिता ने अपने अधिकार छोड़ दिए हो तो उसका नाम जबरन साथ लगाना जरूरी नहीं है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि माता-पिता के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था. जब बच्ची सिर्फ चार महीने की थी (वर्ष 2021) तो दोनों ने आपसी सहमति से तलाक ले लिया था. जिसके बाद से ही बच्ची मां के संरक्षण में है.
मां के संरक्षण में रह रही बच्ची को मिला कोर्ट से राहत
तलाक के दौरान हुए समझौते के मुताबिक पिता इस बात पर राजी हो गया कि नाबालिग बच्चा पूरी तरह मां के संरक्षण में रहेगा और भविष्य में न तो कस्टडी का दावा करेगा और न ही मिलने जुलने के.अधिकार मांगेगा. कोर्ट ने रीजनल पासपोर्ट अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे बच्ची का पासपोर्ट बिना पिता का नाम शामिल किए जारी करें. दिल्ली हाई कोर्ट ने 5 साल की बच्ची की मां की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया है.
दायर याचिका में मां ने कहा था कि बच्ची के पिता के नाम के बिना ही पासपोर्ट बनाने की मांग की थी. पासपोर्ट ऑथोरिटी ने 2024 में बच्चे का पासपोर्ट पिता का नाम बताते हुए जारी किया. जिसको लेकर बच्ची की मां ने दिल्ली हाई कोर्ट में यह याचिका दायर की थी.
स्कूल में बच्ची का सरनेम उसकी मां और नाना-नानी के सरनेम पर दर्ज है. पिता के नाम से उसका कोई डॉक्यूमेंट नही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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