दिल्ली हाई कोर्ट ने एशियाई खेलों के लिए भारत की ड्रेसेज टीम के भारतीय घुड़सवारी महासंघ (ईएफआई) की चयन प्रक्रिया को बरकरार रखा है. जस्टिस मिनी पुष्करणा की सिंगल बेंच ने घुड़सवारी करने वाली सुदीप्ति हाजेला और अनुष अग्रवाला की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है.
क्या है विवाद?
दरअसल, विवाद इस बात को लेकर था कि चयन नियमों का मतलब कैसे निकाला जाए और क्या अंतिम मेरिट सूची बनाते समय अगरवाला के कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओ के स्कोर को गिना जाना चाहिए था. यह विवाद अगरवाला के दो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं जर्मनी में सीडीआई हेगन (22-26 अप्रैल) और बेल्जियम में सीडीआई लियर (20-24 मई) में हासिल किए गए स्कोर को कैसे गिना जाए इसपर केंद्रित है.
चयन मानदंडों के अनुरूप
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि भारतीय घुड़सवारी महासंघ द्वारा अपनाई गई चयन प्रक्रिया निष्पक्ष थी और चयन मानदंडों के अनुरूप थी. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह खेल विशेषज्ञों के फैसलों में तब तक हस्तक्षेप नहीं करेगा जब तक कि प्रक्रिया तर्कहीन या मनमानी न पाई जाए.
कोर्ट ने न्यायिक समीक्षा और खेल चयन के लिए आवश्यक तकनीकी विशेषज्ञता के बीच एक स्पष्ट रेखा निर्धारित किया है. अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यह उसकी भूमिका नहीं है कि वह खेल विशेषज्ञों के निर्णय को अपने निर्णय से बदले.
याचिका में किसको दी गई चुनौती?
इस मामले में ईएफआई को अपनी नीति का सही ढंग से पालन करते पाया गया, जिसने राइडर्स को उनके दो सर्वश्रेष्ठ वैध न्यूनतम पात्रता आवश्यकता स्कोर के आधार पर रैंक किया गया था. इन याचिकाओं में ईएफआई तदर्थ चयन समिति द्वारा 16 जून 2026 को जारी चयन सूची को चुनौती दी गई थी.
विवादित सूची में दोनों याचिककर्ताओ को जापान में होने वाले एशियाई खेलों के लिए भारतीय दल में आरक्षित श्रेणी में रखा गया था. दरअसल ड्रेसेज एक घुड़सवारी का खेल है, जिसमें सवार और घोड़ा एक अखाड़े में पूर्व निर्धारित सटीक गतिविधियों की एक श्रृंखला का प्रदर्शन करते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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