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दिल्ली हाई कोर्ट ने कोमाग्रस्त पति की सेवा के लिए पत्नी को कानूनी अभिभावक नियुक्त

जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ ने प्रोफेसर अलका आचार्य की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि जब परिवार को इलाज के लिए धन की जरूरत हो, तो कोर्ट मूकदर्शक नहीं बना रह सकता. कोर्ट ने पत्नी को पति की चल-अचल संपत्ति के प्रबंधन का अधिकार दिया है.

Himachal Pradesh High Court Recruitment

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Edited by Radha Priya

दिल्ली हाई कोर्ट ने कोमाग्रस्त पति की सेवा के लिए पत्नी को कानूनी अभिभावक नियुक्त किया है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि कोई कानून उन्हें या कानूनी उत्तराधिकारी को अभिभावकीय अधिकार नहीं देता है. ऐसे में चिकित्सकीय खर्चों के लिए पति के बैंक खातों और अन्य उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल कैसे किया जाए.

जिसके बाद जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ ने ‘पैरेंट्स पैट्रिया’ क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए याचिकाकर्ता को अपने पति की चल और अचल संपत्तियों का प्रबंधन करने का अधिकार दिया है, ताकि उनका उचित इलाज और देखभाल सुनिश्चित की जा सके.

अदालत ने कहा- कोर्ट मूकदर्शक नहीं बना रह सकता

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति कोमा में हो और उसकी संपत्ति लॉक हो, जिससे उसका परिवार उसके इलाज और कल्याण के लिए उसका उपयोग न कर सके, तो कोर्ट मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता. कोर्ट ने यह आदेश प्रोफेसर अलका आचार्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है. याचिका में कहा गया है कि मरीज पूरी तरह से बिस्तर पर है और उन्हें 24 घंटे नर्सिंग देखभाल की जरूरत है.

बैंक खातों और संपत्तियों के प्रबंधन की चुनौती

याचिका में उल्लेख किया गया कि इलाज और देखभाल के लिए बड़ी धनराशि की आवश्यकता थी, लेकिन सलाम खान के बैंक खाते और म्यूचुअल फंड या तो उनके अकेले के नाम पर हैं या संयुक्त रूप से, जिनमें उनका हस्ताक्षर अनिवार्य है. इसके चलते परिवार उनकी संपत्तियों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था. जिसके बाद कोर्ट ने एम्स (AIIMS) को मेडिकल बोर्ड गठित कर रिपोर्ट देने को कहा. एम्स ने अपनी रिपोर्ट में पुष्टि की कि खान ‘वेजिटेटिव स्टेज’ में हैं.

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ब्रेन हैमरेज के बाद कोमा में गए सलाम खान

प्रोफेसर अलका आचार्य ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपने पति श्री सलाम खान का कानूनी अभिभावक नियुक्त करने की मांग की थी. सलाम खान और अलका आचार्य की शादी 28 जून 1989 में हुई थी और इनके दो बच्चे हैं. बच्चों ने भी मां की याचिका का समर्थन किया है.

बता दें कि 9 फरवरी 2025 को सलाम खान को ब्रेन हैमरेज हुआ था, जिसके बाद उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने उनका ऑपरेशन किया, लेकिन उसके बावजूद सलाम खान को होश नहीं आया. 14 मार्च को कोमा की स्थिति में ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी.

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-भारत एक्सप्रेस



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