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खेल महासंघों में कलह पर दिल्ली हाई कोर्ट की चिंता, BFI से हल निकालने को कहा

दिल्ली हाई कोर्ट ने खेल महासंघों में लगातार बढ़ रहे आंतरिक विवादों पर चिंता जताई और कहा कि यह खेलों के हित में नहीं है. भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (BFI) की चुनाव प्रक्रिया को लेकर कोर्ट ने पक्षकारों से समाधान निकालने को कहा और चेतावनी दी कि ऐसी कलह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध का कारण बन सकती है.

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दिल्ली हाई कोर्ट ने खेल महासंघों में भीतरी कलह एवं विवादों पर चिंता जाहिर की है. कोर्ट ने कहा है कि ऐसा माहौल खेलने के लिए अच्छा नहीं है. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने यह टिप्पणी भारतीय मुक्केबाजी महासंघ की ओर से दायर अपील पर सुनवाई के दौरान की है. बीएफआई ने उसकी चुनाव प्रक्रिया को लेकर सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी है और अपील दाखिल की है.

महासंघ के सचिव एवं कोषाध्यक्ष के वकील ने सुनवाई के दौरान कहा कि अपील विधिवत दाखिल नहीं कि गई है, क्योंकिं इसे बीएफआई अध्यक्ष ने बिना किसी अधिकार के दाखिल किया है. इसपर याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि सचिव और कोषाध्यक्ष को निलंबित कर दिया गया है. कोर्ट ने पक्षकारों से विवाद का हल निकालने को कहा है.

कोर्ट में महासंघ के अंदरूनी विवाद पर बहस

कोर्ट ने यह भी कहा कि देश को हर खेल महासंघ मुकदमेबाजी में उलझा हुआ है. आपसी विवाद खेल के हित में आड़े आ रहे है. हर खेल महासंघ में कोई ना कोई विवाद है.आपका कार्य पूरे देश को प्रभावित करता है. इस तरह की अंदरूनी लड़ाई क्यों? इस तरह की चीजें आपको अंतरराष्ट्रीय निकाय की ओर से अयोग्य ठहराय जाने का रास्ता बनाती है. कोर्ट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक चार्टर से शामिल होते है.

7 अप्रैल को अगली सुनवाई

चार्टर में कहा गया है कि राष्ट्रीय निकाय को स्वायत होना चाहिए. मुक्केबाजी कर स्वायत्तता से समझौता किया जा रहा है. इस तरह की भीतरी लड़ाई समझ से परे है. हर खेल महासंघ किसी न किसी मुकदमें में उलझा हुआ है. कोर्ट 7 अप्रैल को अगली सुनवाई करेगा. कोर्ट ने कहा कि अगर यह अंदरूनी कलह खत्म नहीं होता है तो हमें पता है कि खेलों के हित में हमें आगे क्या करना है.

बीएफआई ने अपने अपील में सिंगल बेंच के 19 मार्च के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें महासंघ के 7 मार्च के फैसले पर रोक लगा दी गई थी. उसमें खेल निकाय के आगामी चुनावों में केवल अपने संबद्ध राज्य इकाइयों के निर्वाचित सदस्यों को ही अपने- अपने राज्यों का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति दी गई थी.

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-भारत एक्सप्रेस 



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