दिल्ली हाईकोर्ट
पश्चिमी दिल्ली मॉल धोखाधड़ी मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार के मंजूरी प्राधिकरण को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. जस्टिस शैलेन्द्र कौर ने आवश्यक मंजूरी देने में लंबे समय तक कि गई देरी पर चिंता व्यक्त की है. कोर्ट अगस्त में इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.
मामले की सुनवाई के दौरान भ्र्ष्टाचार निरोधक शाखा की उन दलीलों पर सहमति जताई, जिसमें संकेत दिया गया था कि कई संचारों के बावजूद, प्रमुख सार्वजनिक अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की मंजूरी अभी तक नहीं दी गई है.
भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने कार्रवाई में विलंब की पुष्टि की
याचिका में शॉपिंग मॉल परियोजना के संचालन में हुए भ्र्ष्टाचार और वित्तीय अनियमितता के मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आपराधिक दंड कानून के प्राविधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई सरकारी अधिकारी, रियल एस्टेट डेवलपर्स, कॉरपोरेट किरायादार और सब रजिस्ट्रार भी करोड़ों रुपए के भूमि घोटाले में शामिल है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि पश्चिमी दिल्ली स्थित मॉल के संचालन और प्रबंधन में अवैध और धोखाधड़ी वाली गतिविधियों को अंजाम दिया गया है.
वहीं याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कॉरपोरेट संस्थाओं, उनके निदेशकों, सरकारी अधिकारियों और उप-पट्टेदारों ने डीडीए द्वारा विलेख को समाप्त किए जाने के बावजूद सरकारी खजाने को चुना लगाने और संपत्ति में गैरकानूनी रूप से तीसरे पक्ष के हितों को सुनिश्चित करने की साजिश रची.
याचिका में दावा किया गया है कि 100 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय धोखाधडी हुई है, जिससे भूमि किराए सहित बकाया राशि का भुगतान न किए जाने से सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है. याचिका में यह भी कहा गया है कि इसके बावजूद रियल एस्टेट फर्म के निदेशक ने दूसरों के साथ मिलकर शेल कंपनियों का उपयोग कर रद्द की गई भूमि पर अनधिकृत संचालन जारी रखा.
-भारत एक्सप्रेस
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