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‘राजनीतिक मुद्दा मत बनाइए…’ अमित शाह और राहुल गांधी समेत सभी सांसदों पर FIR की मांग करने वाली वकील को हाईकोर्ट की फटकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने बीएनएस की धारा 106(2) को अधिसूचित न करने के मामले में सभी सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी.

Delhi High Court, MCD illegal construction

दिल्ली हाई कोर्ट ने बीएनएस की धारा 106 (2) को अधिसूचित न करने पर सभी सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया है. दायर याचिका में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित सभी सांसदों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी.

दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया ने वकील ऋतु गौबा की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बीएनएस की धारा 1(2) के अनुसार कानून के विभिन्न प्रावधान अलग-अलग तिथियों पर अधिसूचित किया जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि यह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है. कोर्ट इसमें हस्तक्षेप नही कर सकता है.

अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि किसी प्रावधान को कब लागू किया जाए, यह पूरी तरह केंद्र सरकार के विवेक पर निर्भर करता है. कोर्ट ने कहा कि जब तक सरकार संबंधित अधिसूचना जारी नही कर देती तब तक अदालत उस प्रावधान को लागू करने का निर्देश नही दे सकती. कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश दलील के बाद कहा कि इसे राजनीतिक मुद्दा मत बनाइए.

सांसदों की धनराशि में कटौती की मांग को लेकर दाखिल हुई थी याचिका

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने जैसे ही राजनीतिक उदाहरण देने शुरू किए, तो कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए यह बात कही है. दायर याचिका में आगामी मानसून सत्र में बीएनएस की धारा 106 (2) लागू कराने के लिए निर्देश देने की मांग किया गया था. याचिकाकर्ता की यह भी मांग थी कि जब तक यह प्रावधान लागू नही हो जाता, तब तक सभी सांसदों पर जुर्माना लगाया जाए और उनके लिए आवंटित धनराशि में कटौती की जाए.

बता दें कि धारा 106(2) सड़क दुर्घटना के ऐसे मामले से संबंधित है, ड्राइवर की लापरवाही के चलते किसी व्यक्ति की मौत हो जाने के बाद इसकी जानकारी ना तो पुलिस की दी जाती है और ना ही संबंधित जिला के मजिस्ट्रेट को दी जाती है और आरोपी मौके से फरार हो जाता है.

दायर याचिका में कहा गया था कि नागरिकों को सड़क, फुटपाथ, राजमार्ग और फ्लाईओवर पर सुरक्षित जीवन का अधिकार है, और सांसद जनता के प्रतिनिधि होने के चलते अपनी जिम्मेदारियों को निर्वहन करने के लिए बाध्य है.

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-भारत एक्सप्रेस



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