14 साल तक कि उम्र के बच्चों को पंथ निरपेक्ष या धार्मिक शिक्षा देने वाले सभी संस्थाओं का पंजीकरण अनिवार्य करने की मांग को लेकर अश्विनी कुमार उपाध्याय ने याचिका दायर की है. दायर याचिका में केंद्र और देश के सभी राज्यों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की गई है.
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g), 26 और 30 के दायरे और अनुच्छेद 30 (अल्पसंख्यकों का अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और चलाने का अधिकार)में “अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान” अभिव्यक्ति के अर्थ पर भी घोषणाएं मांगी गई. दायर याचिका में यह चिंता जताई गई है कि छोटे बच्चों को पढ़ाई के भारी दबाव और तनाव से बचाने के लिए एक सख्त सिस्टम का होना बहुत जरूरी है. सरकारी स्कूल पहले से ही रजिस्टर्ड और मान्यता प्राप्त है, इसलिए उनके खिलाफ साथ कोई समस्या नहीं है.
अनरजिस्टर्ड स्कूलों के संचालन पर उठा सवाल
प्राइवेट स्कूलों में दो कैटेगरी हैं रजिस्टर्ड और मान्यता प्राप्त संस्थान. हालांकि एक तीसरी कैटेगरी भी सामने आई है, जिसमें कथित तौर पर एक लाख से ज्यादा स्कूल दो कैटेगरी बिना किसी रजिस्ट्रेशन या मान्यता के चल रहे है. इसके पहले भी सुप्रीम कोर्ट में अश्विनी कुमार उपाध्याय ने इसको लेकर याचिका दायर किया था. लेकिन कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संबंधित विभाग के पास भेज दिया था.
कोर्ट ने निर्देश दिया था कि वह इस मांग पर बारीकी से विचार करे और जो भी सही हो वह फैसला ले.
साथ ही कोर्ट ने साफ किया कि न्याय का रास्ता एकतरफा नहीं होता है और ऐसे मामलों में कार्यपालिका यानी सरकार की भी बड़ी भूमिका होती है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा था कि कोर्ट के सामने आपको यह दिखाना होगा कि आपने उसी प्रार्थना के साथ ऑथोरिटी से संपर्क किया और अथॉरिटी ने या तो विचार करने से इनकार कर दिया है या कोई कार्रवाई नहीं कर रही है. आप ऑथोरिटी के पास जाए, अगले राउंड में हम इसपर विचार करेंगे.
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-भारत एक्सप्रेस
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