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नेपाल में मौत, भारत में याचिका! दिल्ली हाई कोर्ट ने पूछा-‘हम कैसे फैसला कर सकते हैं?’

दिल्ली हाई कोर्ट ने काठमांडू हिंसा में भारतीय महिला की मौत से जुड़ी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई पर सवाल उठाए. इसको लेकर कोर्ट ने पूछा कि ‘नेपाल की घटना पर दिल्ली हाई कोर्ट कैसे राहत दे सकता है?’

Edited by Rohit Agrawal

दिल्ली हाई कोर्ट ने नेपाल की राजधानी काठमांडू में Gen Z प्रदर्शन के दौरान हुई भारतीय महिला की मौत से जुड़े मामले में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका(habeas corpus petition) पर गंभीर संदेह जताया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से साफ सवाल किया कि इस याचिका को यहां कैसे सुना जा सकता है. जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ ने कहा कि याचिका में जिस तरह की मांग की गई है, उसमें अदालत कैसे राहत दे सकती है. कोर्ट ने टिप्पणी की, “नेपाल में कुछ होता है, होटल आपसे कुछ करने को कहता है. हम कैसे फैसला कर सकते हैं?”

26 फरवरी को होगी अगली सुनवाई

कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा सुनवाई को लंबे समय के लिए टालने की मांग को खारिज कर दिया. केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने कहा कि क्या इस मामले को अगले हफ्ते के लिए टाला जा सकता है. इस पर जस्टिस कौरव ने पूछा कि अब तक क्या प्रोग्रेस हुई है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सोनम वांगचुक की सेहत को देखते हुए हिरासत पर दोबारा विचार करने का सुझाव दिया था. केंद्र ने बताया कि सोनम वांगचुक को बेहतर इलाज दिया जा रहा है. जस्टिस पी बी वराले ने कहा कि सेहत से जुड़े मुद्दे साफ दिख रहे हैं और सरकार भी इन्हें नकार नहीं रही. कोर्ट ने केंद्र की दलील पर नाराजगी जताई कि जयपुर या एम्स में इलाज लद्दाख से बेहतर है. कोर्ट ने कहा कि यह हैबियस कॉर्पस का मामला है, इसलिए इसमें देरी नहीं हो सकती.

याचिकाकर्ता ने 100 करोड़ मुआवजे की मांग की

याचिकाकर्ता रणबीर सिंह गोला ने अपनी पत्नी की मौत के लिए भारत सरकार, संबंधित संवैधानिक प्राधिकरणों और हयात होटल ग्रुप से 100 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की है. याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील अभिषेक चौधरी के माध्यम से दायर की गई है. याचिकाकर्ता के अनुसार, वे और उनकी पत्नी सात सितंबर 2025 को धार्मिक यात्रा के लिए नेपाल गए थे. पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन के उद्देश्य से हयात रीजेंसी काठमांडू में ठहरे थे. उसी दौरान काठमांडू में हिंसा भड़क गई. होटल प्रशासन ने हालात की जानकारी नहीं दी और झूठा सुरक्षा का आश्वासन देकर होटल छोड़ने से रोका. होटल के ऊपरी मंजिल पर शिफ्ट होने के लिए प्रेरित किया.

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वहीं बता दें कि 9 सितंबर 2025 को हिंसक भीड़ ने हयात होटल पर हमला किया और परिसर में आगजनी की. हैरानी की बात यह कि न तो फायर अलार्म बजा और न ही मेहमानों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया गया. होटल के कर्मचारी फरार हो गए. फंसे मेहमानों को ऊपरी मंजिलों से कूदने की अमानवीय सलाह दी गई. भारतीय नागरिकों ने भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय को बार-बार कॉल की, लेकिन कोई सहायता नहीं मिली. याचिकाकर्ता और उनकी पत्नी को जान बचाने के लिए अस्थायी रस्सियों के सहारे निकलने का प्रयास करना पड़ा. इसी दौरान स्वर्गीय श्रीमती राजेश गोला चौथी मंजिल से गिर गईं. गंभीर रूप से घायल होने के बाद स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराई गईं, जहां उनकी मौत हो गई।

कोर्ट ने केंद्र को MoU मसौदा पेश करने का दिया निर्देश

कोर्ट ने केंद्र सरकार को 4 सप्ताह में साइबर फ्रॉड रोकने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) का मसौदा तैयार करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि यह समस्या बहुत गंभीर है. वरिष्ठ नागरिक सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं. पूरी जिंदगी की जमा-पूंजी एक झटके में लुट जाती है. कोर्ट ने 2 जनवरी 2026 से लागू आरबीआई के SOP को पूरे देश में लागू करने का भी आदेश दिया.

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-भारत एक्सप्रेस



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