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13 लॉ रिसर्चर्स की ओर से वेतन बढोत्तरी की मांग को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस, मांगा जवाब।

दिल्ली हाईकोर्ट में 13 विधि शोधकर्ताओं ने वेतन बढ़ोतरी लागू न होने पर याचिका दाखिल की. कोर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर मांगा जवाब. अगली सुनवाई 21 अगस्त को.

Delhi High Court
Edited by Radha Priya

Delhi High Court ने 13 लॉ रिसर्चर्स की ओर से वेतन बढोत्तरी की मांग को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

कोर्ट 21 अगस्त को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि लॉ रिसर्चर्स को कई भूमिकाएं निभानी होती हैं, उन्हें देर रात तक काम करना पड़ता है और सप्ताहांत पर भी सेवाएं देनी पड़ती हैं

कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया दिल्ली सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए और फैसला लेना चाहिए. दायर याचिका में मासिक पारिश्रमिक को 65 हजार रुपए से बढ़ाकर 80 हजार रुपए करने तथा बकाया राशि देने की मांग की गई है.

यह याचिका 13 शोधकर्ताओं ने दाखिल की है, जो वर्ष 2018 से वर्ष 2025 के बीच दिल्ली हाईकोर्ट में बतौर विधि शोधकर्ता के रूप में संविदा के आधार पर कार्यरत थे या हैं.

याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की ओर से जारी निर्देशों को लागू करने की मांग की है, जिसमें विधि शोधकर्ताओं का मासिक पारिश्रमिक 1 अक्टूबर, 2022 से बढ़ाकर 80 हजार रुपए करने तथा बकाया राशि पर 18 फीसदी की दर से प्रति वर्ष की दर से ब्याज देने की बात कही गई थी.

पारिश्रमिक बढ़ोतरी लागू न होने पर याचिका दाखिल

याचिका में कहा गया है कि 16 अगस्त, 2023 को मुख्य न्यायाधीश ने 1 अक्टूबर, 2022 से पारिश्रमिक बढ़ाकर 80 हजार रुपए करने को मंजूरी दी थी. लेकिन इस आदेश को अभी तक लागू नहीं किया गया है.

याचिका कहा गया है कि दिल्ली सरकार को उक्त प्रस्ताव भेजे दो साल हो गए हैं, लेकिन उसे अभी तक लागू नहीं किया गया है. यहां तक कि 7 मई, 2024 को स्पष्टीकरण दिए जाने के बाद भी आदेश को लागू नहीं किया गया है.

इस तरह से मुख्य न्यायाधीश के 16 अगस्त, 2023 के आदेश का पालन नहीं किए जाने की वजह से याचिका दाखिल करने को मजबूर होना पड़ा है.

याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि उपराज्यपाल की मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश को मंजूरी न देने या खारिज करने और सिफारिश को दबाए रखने की कार्रवाई गलत है

इस तरह की कार्रवाई याचिकाकर्ताओं और अन्य लोगों को न्यायाधीशों के साथ जुड़ाव के दौरान कानून शोधकर्ताओं की कड़ी मेहनत और लंबे समय के लिए उच्च मासिक पारिश्रमिक प्राप्त करने के लाभ या लाभ से वंचित करती है.


-भारत एक्सप्रेस



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