सीवर की सफाई करता सफाईकर्मी (फाइल फोटो)
दिल्ली हाई कोर्ट ने राजधानी में सार्वजनिक शौचालयों में गंदगी और सुविधाओं की कमी को लेकर दिल्ली सरकार, एमसीडी, डीडीए और एनडीएमसी को फटकार लगाई है. मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने इसके लिए एक योजना बनाने का निर्देश दिया है.
कोर्ट ने पूछा कि यह होना चाहिए, यह होगा, लेकिन कब होगा? कोर्ट ने कहा हम शौचालयों की सफाई का काम अपने हाथ में ले रहें है. कोर्ट ने योजना तैयार करने के लिए सरकार को दो महीने का समय दिया है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सार्वजनिक शौचालयों से संबंधित शिकायतों के निपटान के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) एवं नई दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) से एक साझा ऐप विकसित करने को कहा था.
कोर्ट ने कहा था कि हमें उम्मीद है कि ये तीनों निकाय शिकायत करने कि प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक साझा ऐप विकसित करने के लिए कोई समाधान निकालने का गंभीर प्रयास करेंगे. उसने यह बात शहर में स्वच्छ जल और बिजली आपूर्ति के साथ स्वच्छ सार्वजनिक मूत्रालयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग वाली जनसेवा वेलफेयर सोसाइटी की याचिका पर सुनवाई के दौरान कही थी.
वहीं, एमसीडी ने स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर कहा था कि शौचालयों का तीसरे पक्ष से ऑडिट कराया गया था और उसकी स्थिति संतोषजनक पाई गई. वह सार्वजनिक शौचालयों से संबंधित शिकायतों के निवारण एवं शिकायतें लेने के लिए एक ऐप लांच किया है. इस पर कोर्ट ने एमसीडी से समाचार पत्रों या अन्य माध्यम से उसका प्रचार करने को कहा था, जिससे आम लोग इससे वाकिफ हो सकें.
साथ ही एप का प्रचार शौचालयों पर भी लिखकर प्रदर्शित करने को कहा. उसने यह भी कहा यह था कि यदि इस मुद्दे पर एकिल एप विकसित किया जाता है, जिसका उपयोग सभी एजेंसियों जैसे एमसीडी, एनडीएमसी और डीडीए करता है तो लोगों को शिकायत दर्ज करना आसान हो जाएगा.
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