Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा है कि कमाने की क्षमता और वास्तविक कमाई दो अलग-अलग मुद्दे है. उसने यह कहते हुए एक बीटेक के साथ एमबीए पत्नी को भरण-पोषण देने के पारिवारिक अदालत के फैसले को बरकरार रखा है. जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रेणु भटनागर की बेंच ने कहा कि जब दंपति अलग हुए थे, तब उनका बच्चा बहुत छोटा था. बच्चे की देखभाल के लिए पत्नी ने अपनी नौकरी छोड़ दी होगी.
असल कमाई है भरण-पोषण का आधार- कोर्ट
समय बीतने के साथ अनुभव की कमी या अन्य करणों से उसे उपयुक्त रोजगार नहीं मिल सकता. ऐसी परिस्थितियों में केवल कमाने की क्षमता के आधार पर उसे अपने बच्चे के लिए भरण-पोषण देने से इनकार नही किया जा सकता है. अदालत ने यह कहते हुए पति की अपील को खारिज कर दिया है.
पति ने पारिवारिक अदालत के आदेश को दिया था चुनौती
पति ने पारिवारिक अदालत के उस आदेश को चुनौती दिया था, जिसमें उसे पत्नी को प्रति माह 10 हजार रुपये तथा नाबालिग बेटी को प्रति माह 15 हजार रुपये भरण-पोषण देने का आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा कि पति स्वेच्छा से अपनी मां को 35000 रुपये का भरण-पोषण भत्ता दे रहा था, इसलिए उसे अपनी पत्नी और बच्चे को दी गई राशि को अत्यधिक बताकर उस पर आपत्ति नहीं करनी चाहिए थी.
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पत्नी के पास बी. टेक और एमबीए की डिग्री
पति की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि पत्नी के पास बी. टेक और एमबीए की डिग्री है और वह शादी से पहले तीन लाख प्रति वर्ष कमाती थी, और भरण-पोषण याचिका दायर करने के बाद भी उसकी अच्छी खासी इनकम है. उन्होंने यह भी कहा कि पत्नी ने भरण-पोषण के लिए दायर याचिका में झूठा दावा किया है कि वह पिछले 2 वर्षों से कमाई नहीं कर रही है. हाई कोर्ट ने कहा कि पति फैमिली कोर्ट के समक्ष यह साबित करने के लिए कोई सबूत नही कर पाया कि पत्नी वर्तमान में काम कर रही हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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