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दिल्ली हाईकोर्ट ने आपराधिक मानहानि मामले में स्वामी की अपील पर बग्गा से जवाब मांगा

दिल्ली हाईकोर्ट ने भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की आपराधिक मानहानि मामले में अपील पर शिकायतकर्ता तेजिंदर बग्गा को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त को होगी.

दिल्ली हाईकोर्ट

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Vijay Ram Edited by Vijay Ram

दिल्ली हाईकोर्ट ने आपराधिक मानहानि के मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता सुब्रमण्यम स्वामी की अपील पर पार्टी नेता व शिकायतकर्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा से जवाब दाखिल करने को कहा है. शिकायतकर्ता बग्गा की शिकायत पर नेता स्वामी को निचली अदालत से समन जारी किया था, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी है और अपील दाखिल की है.

न्यायमूर्ति रविंद्र डुडेजा ने बग्गा को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया और उनसे विचार करने लायक प्रमुख बिंदुओं का भी उल्लेख करने को कहा. साथ ही स्वामी से बग्गा के जवाब का उत्तर उसके दो हफ्ते के बाद देने को कहते हुए सुनवाई 26 अगस्त के लिए स्थगित कर दी.

बग्गा की शिकायत पर मानहानि का मामला दर्ज

बग्गा की शिकायत पर राऊज एवेन्यू कोर्ट के मस्ट्रिेट की अदालत ने स्वामी को समन जारी किया था. उसे ही स्वामी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है और मामले की कार्यवाही को रद्द करने की मांग की है. कोर्ट ने 4 अप्रैल, 2022 को इस मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी.

स्वामी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि बग्गा ने अब तक मामले में अपना जवाब दाखिल नहीं किया है. बग्गा के वकील ने इसके बारे में पूछे जाने पर बताया कि स्वामी को पहले अपनी याचिका की स्वीकार्यता के मुद्दे पर दलीलें पेश करनी थीं. यह निर्देश हाईकोर्ट ने उन्हें पहले दिया था. न्यायमूर्ति ने इसपर कहा कि बग्गा को कम से कम अपना जवाब दाखिल करना चाहिए. उसमें स्वीकार्यता के मुद्दे पर अपनी दलीलें भी पेश करनी चाहिए.

कोर्ट ने अगली सुनवाई 26 अगस्त के लिए तय की

मजिस्ट्रेट की अदालत ने 22 मार्च, 2022 को पूर्व राज्यसभा सदस्य को मानहानि मामले में आरोपी के तौर पर तलब किया था और कहा था कि उनके खिलाफ कार्यवाही चलाने के लिए पर्याप्त आधार है.

बग्गा ने सितंबर 2021 में आरोप लगाया था कि स्वामी ने एक ट्वीट में झूठा दावा कर कहा था कि भाजपा में शामिल होने से पहले बग्गा को नई दिल्ली मंदिर मार्ग थाने ने छोटे-मोटे अपराधों के लिए कई बार जेल भेजा था. स्वामी के वकील ने दलील दी थी कि अधीनस्थ अदालत का आदेश गलत था, क्योंकि उनके ट्वीट को गलत तरीके से पेश किया गया था.

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-भारत एक्सप्रेस 



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