Bharat Express DD Free Dish

नमाज के लिए 2 किमी दूर की जगह पर अड़ा मुस्लिम पक्ष; सुप्रीम कोर्ट में 29 जुलाई को बड़ा फैसला

Bhojshala Dispute MP: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज के लिए वैकल्पिक जमीन देने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 29 जुलाई को सुनवाई करेगा. मुस्लिम पक्ष ने नमाज के लिए दूर जगह दिए जाने पर आपत्ति जताई है, जबकि कोर्ट ने आदेश के सही पालन के निर्देश दिए हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से बुजुर्गों की सुविधाओं पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी.

सुप्रीम कोर्ट

Edited by Shubhra Rai

Bhojshala Dispute MP: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर के पास जुमे की नमाज के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने संबंधित मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 29 जुलाई को सुनवाई करेगा.

क्या है मामला?

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हुफैजा अहमदी ने मेंशन कर जल्द सुनवाई की मांग की. जिसपर कोर्ट ने 29 जुलाई को सूचीबद्ध करने को कहा है. पिछली अहमदी ने कहा था कि कोर्ट के आदेश के मुताबिक मुसलमानों के नमाज पढ़ने के लिए जो दूसरी जगह दी गई है, वह 2 किलोमीटर दूर है. उन्होंने कहा था कि हम पहले ही दो शुक्रवार से नमाज नहीं पढ़ पाए है. जबकि मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि जो जगह दी गई है, वह 900 मीटर दूर है.

सीजेआई सूर्यकांत ने एसजी मेहता से सरकार से पास की जगह देने के बारे में निर्देश लेने को कहा था. जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का पिछला आदेश का अक्षरतः और उसकी भावना के अनुरूप पालन होना चाहिए. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने ढांचे में किसी तरह के बदलाव पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था. कोर्ट ने भोजशाला परिसर के पास जगह मुहैया कराने का आदेश दिया था ताकि शुक्रवार को 1 बजे से तीन बजे के बीच नमाज अदा कर सके.

देवी वाग्देवी के मंदिर के रूप में मान्यता दी गई

मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा था कि कोई अंतरिम व्यवस्था राज्य सरकार की ओर से की जाए. ताकि दोनों पक्षों को कोई परेशानी नहीं हो और नमाज भी अदा की जा सके. मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हुफैजा अहमदी ने कहा था कि मुझे अंतरिम राहत मिलनी चाहिए. क्योंकि इस मामले में आदेश को लागू करने में बहुत जल्दबाजी की गई. हुफैजा ने कहा था कि सन 1500 से जो यथास्थिति बनी हुई थी, वो खत्म की गई, जिसमें सीधे तौर पर एक तरफा किया है.

वही वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि एक दिन के भीतर संस्कृति मंत्रालय द्वारा तय कर दिया गया कि एक समुदाय का प्रवेश प्रतिबंध रहेगा. जस्टिस बागची ने कहा था कि क्या आपको लगता है कि इस तरह की दलीलों से हम फैसले पर रोक लगाने का निर्णय तत्काल ले लेंगे. वही केंद्र और राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने मुस्लिम पक्ष की ओर से रोक या यथास्थिति की मांग का विरोध किया था. भोजशाला परिसर को देवी वाग्देवी के मंदिर के रूप में मान्यता दी गई है.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि,

मस्जिद पक्ष यदि सरकार को आवेदन देता है तो उसे अलग जमीन उपलब्ध कराई जाएगी. सरकार इंग्लैंड से वाग्देवी की प्रतिमा लाने का प्रयास करें. रिपोर्ट में भोजशाला परिसर के वो 188 मूल आधार स्तंभ जिनमें 106 मुख्य स्तंभ और 8 अर्द्धस्तंभों फैसला का मुख्य आधार बने. जिन पर हिंदू धर्म से जुड़े प्रतीक, देवी देवताओं की आकृतियों और मंदिर शैली कीनक्काशी मिलने का दावा किया गया. इन्ही तथ्यों को आधार मानते हुए हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है.

यह भी पढ़ें- NEET पेपर लीक: डॉ. मनोज शिरूरे की जमानत खारिज, CBI बोली- ‘यह देश के खिलाफ अपराध’

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read