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जेएसडब्ल्यू मामला: ईडी की ओर से पेश एसजी तुषार मेहता ने कहा कि ईडी ने 23000 करोड़ रुपये वसूले और पीड़ितों को वापस कर दिया

JSW केस की सुनवाई में ED ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अब तक 23,000 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की रकम वसूली जा चुकी है, जो पीड़ितों को वापस दी गई है. कोर्ट भूषण स्टील केस पर पुनर्विचार को भी तैयार है.

CJI BR Gavai

सीजेआई बीआर गवई

जेएसडब्ल्यू मामले की सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीजेआई बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष बताया कि लगभग 23000 करोड़ रुपये मनी लॉन्ड्रिंग के तहत रकम वसूल कर वित्तीय अधिकारों के पीड़ितों को वापस दिया गया है. मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा यहां भी ईडी मौजूद है. जिसपर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कोर्ट को एक ऐसा बात बताना चाहता हूं, जो आज तक किसी ने नही बताई है. ईडी ने अबतक 23000 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की रकम वसूल की है और उसे पीड़ितों को लौटाया है. उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि जो पैसा वसूला जाता है, उस पैसे को सरकार अपने पास नही रखती है. बल्कि उसे अपराध के पीड़ितों को वापस कर दिया जाता है.

फैसले पर पुनर्विचार के लिए  सहमति

हालही में कोर्ट ने भूषण स्टील के फैसले पर दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. सीजेआई बीआर गवई और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने पहले के फैसले को वापस लेते हुए कहा था कि मामले में नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता है. सीजेआई गवई ने कहा था कि अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्ति का इस्तेमाल किसी पुनर्जीवित कंपनी के 25000 कर्मचारियों के साथ अन्याय करने के लिए नहीं कर सकता.

फैसले की केवल कानूनी वैधता होगी जांच- कोर्ट

सीजेआई ने कहा था कि प्रथम दृष्टया हम पुनर्विचार की अनुमति देने पर सहमत हैं. हम पूरी सुनवाई करेंगे, लेकिन प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि यह निर्णय पहले से तय फैसलों के अनुरूप नहीं है. सीजेआई गवई ने यह स्पष्ट कर दिया था कि कोर्ट केवल फैसले की कानूनी वैधता पर ही गौर करेगा. उन्होंने यह भी कहा था कि हम किसी नए दस्तवेज़ पर नहीं जाएंगे, केवल पुराने फैसले की समीक्षा करेंगे. यह जरूरी है कि ऐसे निर्णय कानून के दायरे में और कर्मचारियों के हित में हो.

बता दें कि दिसंबर 2024 में जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने बीपीएसएल के लिए जेएसडब्ल्यू की योजना को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि लेनदारों की समिति (सीओसी) ने योजना को मंजूरी देने में गलती की थी. लेकिन जेएसडब्ल्यू ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की, जिसके बाद कोर्ट ने 2 मई के अपने फैसले को वापस ले लिया.

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भारत एक्सप्रेस



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