आईआरसीटीसी (IRCTC) घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट 29 अगस्त को अपना फैसला सुनाएगी. स्पेशल जज डॉ. विशाल गोगने की अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें और जिरह सुनने के बाद आरोप (चार्ज) तय करने के बिंदु पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था. इस फैसले से तय होगा कि पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की कानूनी मुश्किलें कितनी बढ़ेंगी.
लालू, राबड़ी और तेजस्वी समेत 16 आरोपी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर इस चार्जशीट में लालू प्रसाद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, सांसद मीसा भारती और हेमा यादव को मुख्य आरोपी बनाया गया है.
लालू परिवार के अलावा कुछ अन्य नेताओं, अधिकारियों और कंपनियों समेत कुल 16 लोगों को इसमें नामजद किया गया है. इनमें आईआरसीटीसी के पूर्व ग्रुप जनरल मैनेजर वीके अस्थाना, आरके गोयल और सुजाता होटल्स के निदेशक विजय कोचर व विनय कोचर के नाम भी शामिल हैं.
‘लालू की जानकारी में रची गई साजिश’
पिछली सुनवाइयों के दौरान अदालत ने माना था कि टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी और आर्थिक फायदा पहुंचाने की यह साजिश लालू प्रसाद यादव की पूरी जानकारी में रची गई थी. अदालत ने आरोपों को काफी गंभीर प्रकृति का माना है.
गौरतलब है कि इसी मामले से जुड़ी सीबीआई की मुख्य प्राथमिकी (FIR) में लालू यादव और अन्य के खिलाफ पहले ही धोखाधड़ी (IPC 420), आपराधिक साजिश (IPC 120B) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय हो चुके हैं, जिसका ट्रायल जारी है.
क्या है IRCTC घोटाला?
साल 2004 से 2009 के दौरान जब लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री थे, तब रेलवे बोर्ड ने ट्रेनों और रेलवे होटलों की कैटरिंग सेवा पूरी तरह IRCTC को सौंप दी थी. इसी दौरान झारखंड के रांची और ओडिशा के पूरी स्थित BNR होटलों के रखरखाव, संचालन और विकास के टेंडर जारी करने में भारी धांधली और वित्तीय अनियमितताओं की बात सामने आई थी.
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में साल 2017 में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपनी चार्जशीट दाखिल की थी. आपको बता दें कि यह मामला रेलवे के ‘लैंड फॉर जॉब’ (जमीन के बदले नौकरी) घोटाले से पूरी तरह अलग है.
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-भारत एक्सप्रेस
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