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जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में आरोपी और बारामूला से सांसद राशिद इंजीनियर की अंतरिम जमानत याचिका पर हाई कोर्ट ने एनआईए को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

बारामूला से सांसद इंजीनियर राशिद की अंतरिम जमानत याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने एनआईए को नोटिस भेजा है. मामला टेरर फंडिंग केस से जुड़ा है, जिसमें वह 2019 से जेल में बंद हैं.

J&K terror funding
Edited by Radha Priya

J&K Terror Funding: Delhi High Court ने जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में आरोपी और बारामूला से सांसद अब्दुल रशीद शेख उर्फ राशिद इंजीनियर की ओर से दायर अंतरिम जमानत याचिका पर एनआईए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस शालिन्दर कौर की बेंच 29 जुलाई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.

राशिद इंजीनियर की ओर से दायर अंतरिम जमानत याचिका को पटियाला हाउस कोर्ट ने खारिज कर दिया था. जिसके खिलाफ राशिद इंजीनियर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. पटियाला हाउस कोर्ट ने राशिद इंजीनियर को 24 जुलाई से चार अगस्त के लिए कस्टडी पैरोल दे दिया था.

मामले की सुनवाई के दौरान राशिद इंजीनियर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरिहरन ने कोर्ट को बताया कि कस्टडी पैरोल में होने वाले 17 लाख रुपए खर्च इंजीनियर को ही वहन करने के लिए कहा गया है.

साथ ही कोर्ट निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दाखिल उनकी अपील पर भी 29 जुलाई को सुनवाई करेगा. राशिद इंजीनियर ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामूला सीट पर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को हराया था.

राशिद इंजीनियर शेख अब्दुल रशीद के नाम से भी जाना जाता है. वह 2017 के आतंकवादी वित्तपोषण (आतंकी फंडिंग) मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से रशीद 2019 से जेल में बंद है.

आतंकवादी समूहों को फंडिंग के आरोप में वटाली को किया था गिरफ्तार

बता दें कि कश्मीरी कारोबारी जहूर वटाली से पूछताछ के दौरान पूर्व विधायक शेख अब्दुल राशिद का नाम सामने आया था. एनआईए ने कश्मीर घाटी में आतंकवादी समूहों और अलगाववादियों को फंड देने के आरोप में वटाली को गिरफ्तार किया था.

पटियाला हाउस कोर्ट ने 16 मार्च 2022 को हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासीन मलिक, शब्बीर शाह और मसरत आलम, राशिद इंजीनियर, जहूर अहमद वताली, बिट्टा कराटे, आफताब बट्ट उर्फ पीर सैफुल्ला के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था.

एनआईए में मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सहयोग से लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन, जेकेएलएफ, जैश-ए- मोहम्मद जैसे संगठनों ने जम्मू कश्मीर में आम नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमले और हिंसा को अंजाम दिया. 1993 में अलगाववादी गतिविधियों अंजाम देने के लिए ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस की स्थापना की गई.

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-भारत एक्सप्रेस



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