जवाहरलाल नेहरू विविद्यालय (JNU) के निलंबित नौ छात्रों को दिल्ली हाई कोर्ट से फिलहाल राहत मिल गई हैं. कोर्ट निलंबित छात्रों को होने वाली परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी है. साथ ही उन छात्रों को फिलहाल हॉस्टल से नहीं निकालने को भी कहा है. जस्टिस विकास महाजन ने इसके साथ ही निलंबन को चुनौती देने वाली छात्रों की याचिका पर जेएनयू प्रशासन को नोटिस जारी कर एक हफ्ते में इस मुद्दे पर जवाब देने को कहा है. छात्रों से भी जवाब का उत्तर देने को कहते हुए सुनवाई 28 मई के लिए स्थगित कर दी है.
छात्रों ने कोर्ट से कहा कि उनलोगों को बिना पक्ष सुने हुए निलंबित कर दिया गया है. इस मामले में कमेटी गठित की गई थी, लेकिन उसने हमलोगों का पक्ष नहीं सुना और एकतरफा निलंबन का आदेश पारित कर दिया है. इस तरह से प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन हुआ है. उनके निलंबन के आदेश को रद्द कर दिया जाए. कोर्ट ने इसके बाद छात्रों को अगले आदेश तक परीक्षा देने का निर्देश देते हुए उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई भी नहीं करने को कहा है. कोर्ट ने कहा कि यह अंतरिम आदेश अंतिम आदेश के फल फलाफल माना जाएगा.
विविद्यालय से किया गया निलंबित
छात्रों पर 22 अक्टूबर, 2024 को हुए फ्रेसर्स पार्टी में मारपीट करने, यौन उत्पीड़न और हिंसा में शामिल होने के आरोप है. इसको लेकर उन्हें विविद्यालय से निलंबित कर दिया गया था. छात्रों ने 25 अक्टूबर को मुख्य प्राक्टर के उस आदेश को चुनौती दी है जिसके तहत उनलोगों को विविद्यालय से निलंबित कर दिया गया है. इसके अलावा छात्रों को तत्काल प्रभाव से दो सेमेस्टर के लिए परिसर में प्रवेश करने पर भी रोक लगा दिया गया था.
यह मामला कथित तौर पर जेएनयू की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के समक्ष लगभग 47 छात्राओं की संयुक्त शिकायत से संबंधित है. घटना 22 अक्टूबर को सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स (सीएसएसएस) की ओर से आयोगित फ्रेसर्स पार्टी के दौरान जेएनयू के कन्वेंशन सेंटर में हुई हुई थी. बताया जाता है कि कुछ छात्रों ने उस दौरान लैंगिंक भेदभाव वाले टिप्पणी की थी, जिसके बाद हाथापाई शुरू हो गई थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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