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सुपरस्टार कमल हासन की अपकमिंग फिल्म ठग लाइफ को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने कमल हासन की फिल्म ‘ठग लाइफ’ पर दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार किया और याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की सलाह दी. फिल्म को लेकर धमकियों और विवादित बयानों के चलते कर्नाटक में विरोध जारी है.

Kamal Haasan Thug Life
Edited by Akansha

सुपरस्टार कमल हासन की अपकमिंग फिल्म ठग लाइफ को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है. जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने थियेटर एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार किया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है. याचिकाकर्ता के मुताबिक फिल्म को लेकर लगातार धमकियां मिल रही है. थिएटर में आग लगाने की बात कही जा रही है.

कमल हासन की फिल्म ठग लाइफ विवादों में घिरी

हाल ही में कमल हासन की अपकमिंग फिल्म ठग लाइफ इन दिनों विवादों में घिरी हुई है. हाल ही में कमल हासन द्वारा कन्नड़ भाषा को लेकर दिए गए एक विवादित बयान के बाद कर्नाटक में कई संगठनों के विरोध जताया हैं. दरअसल यह एक तमिल भाषा की गैंगेस्टर एक्शन फिल्म है. जिसे मणिरत्नम ने डायरेक्ट किया है. फिल्म में कमल हासन के साथ तृषा कृष्णन भी काम कर रही हैं.

कमल हासन ने फिल्म के लिए नहीं ली कोई फीस

हालांकि इस फिल्म के लिए कमल हासन ने कोई फीस नहीं ली है. वो प्रॉफिट शेयरिंग पर काम कर रहे हैं. इस फिल्म में कमल हासन के अलावा सिलंबरासन अली फजल, नस्सर, अभिरामी, अशोक सेल्वन शामिल है. फिल्म का निर्देशन मणि रत्नम ने किया है. यह एक गैंगेस्टर ड्रामा फिल्म है. कमल हासन इस फिल्म के सहलेखक भी हैं.हालांकि इसको लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है. जिसपर 10 जून को कोर्ट सुनवाई करने वाला हैं.

कर्नाटक में फिल्म की रिलीज के लिए पर्याप्त सुरक्षा का अनुरोध

याचिका में कर्नाटक में फिल्म की रिलीज के लिए पर्याप्त सुरक्षा का अनुरोध किया है. पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने कमल हसन से माफी मांगने को कहा था. क्योंकि कमल हासन ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि कन्नड़ का जन्म तमिल से हुआ है. कोर्ट ने यह भी कहा था कि एक माफी से पूरा हल सुलझ सकती थी.

किसी भी नागरिक को भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं

इसके अलावा कोर्ट ने कहा था कि किसी भी नागरिक को भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं है. अदालत ने कहा था कि इस मामले में माफी नहीं मांगी गई, भले ही ये प्रतीकात्मक ही क्यों न हो. इस देश का विभाजन भाषाई आधार पर हैं. कोई सार्वजनिक व्यक्ति इस तरह के बयान नहीं दे सकता.

-भारत एक्सप्रेस 



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